रात का अस्तित्व मिटा रही है एलईडी लाइट्स,जानिये कैसे

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जयपुर। रोशनी की ओर कदम बढ़ाते हुये हर कोई आगे जाना चाहता है लेकिन रात का क्या। पता है लोगों ने रात के अंधेरे को पीछे छोड़ा दिया है। दुनिया में सुबह से लेकर अगली सुबह तक हर तरफ इतनी लाइट्स जगमगाती रहती हैं कि रात कब गुजरी इसका पता नहीं ही नहीं रहता लोगों को। दुनिया में इतना चकाचौंद है कि रात का अंधेरा खो गया है। शोधकर्ताओं ने इसके बारे में शोध किया और बताया कि हर वर्ष कृत्रिम प्रकाश के बढ़ते स्त्रोतों की संख्या पृथ्वी की चमक 2 प्रतिशत तक बढ़ जाती है।

इन्होंने बताया कि यह दर ज्यादातर विकसित देशों की वज़ह से बढ़ रही है जिसका सीधा असर रात पर पड़ता है। आपको यकिन नहीं होगा कि  आर्टीफिशियल लाइट्स की रंग बिरंगी चकाचौंध एक तरह का प्रकाशीय प्रदूषण है, जो धरती पर रात के वजूद को मिटा रहा है। क्याबा और उनकी टीम ने चार साल तक सुयोमी उपग्रह से मिले आंकड़ों पर अध्ययन किया है और इस शोध के लिए इस तकनीक में विजिबल इंफ्रारेड रेडियोमीटर सुइट का इस्तेमाल किया है। बता दे कि ये तकनीक पृथ्वी के धरातल से परावर्तित होती हुई कृत्रिम रोशनी को ऑब्जर्व करती है।

इस रिसर्च के दौरान कुछ चौंकाने वाले तथ्य भी सामने आये हैं। वैज्ञानिकों बताया कि वर्तमान समय में एलईडी तथा सीएफएल लाइट्स का बढ़ता उपयोग भी इसके लिये जिम्मेदार है। जैसा की हम जानते है कि एलईडी लाइट सामान्यतया नीले रंग का प्रकाश देती है, जो कि एयर मोलिक्यूल्स से सबसे ज्यादा स्केटर्ड होती है। हैरान कर देने वाली बात तो ये है कि यह स्केट्रिंग लाइट पॉल्यूशन को कई गुना बढ़ा देती है जिससे आकाश की डार्कनेस कम हो जाती है, तथा तारे भी कम नज़र आते हैं।

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