इस मंदिर में AC बंद करते ही माता को आने लगता है पसीना

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दोस्तों, भारत में ना जाने कितने ही मंदिर मौजूद हैं मगर आज हम आपको जिस अ​नोखे मंदिर के बारे में बताएंगे उसके बारे में जानकर आप भी चौंक जाएंगे । बता दें, मध्यप्रदेश के जबलपुर जिले में एक ऐसा ही स्थान है। जहां स्थित काली माई की प्रतिमा से पसीना निकलता है । इनके लिए भक्तों ने इस मंदिर में एसी लगवा दिया है मगर सबसे हैरानी की बात तो ये है कि, जैसे ही एसी बंद होता है काली माई को फिर पसीना बहने लगता है । जबलपुर शहर के सदर क्षेत्र में स्थित इस काली मंदिर में लगभग 550 साल पुरानी माता काली की भव्य प्रतिमा गोंडवाना साम्राज्य के दौरान स्थापित की गई थी ।

बताया जाता है कि स्वयंसिद्ध देवी की प्रतिमा को जरा सी भी गर्मी सहन नहीं होती और मूर्ति से पसीना निकलने लगता है । मंदिर ट्रस्ट के पंडित ने बताया है कि, रानी दुर्गावती के शासनकाल में मदनमहल पहाड़ी में निर्मित मंदिर में स्थापित करने के लिए शारदा देवी की प्रतिमा के साथ इस प्रतिमा को मंडला से जबलपुर लाया जा रहा था ।

 

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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