यहां के पुरूषों को पहनने पड़तें हैं महिलाओं के कपड़े, वजह जानकर हो जाएंगे हैरान

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हमारे देश में कई तरह की पंरमराएं होती है​ जिनमें कई को निभाना तो आसान होता हैं और कई को निभाना बहुत ही मुश्किल होता हैं आज भी हम आपको कुछ ऐसा ही बताने जा रहे हैं जहां पर पुरूषों को महिलाओं के कपड़ें पहनने पड़ते हैं । हम आपको आपको बता दें कि इस तरह को काम थाईलैंड के एक गांव में होता है। जहां लड़के औरतों के कपड़े वियर करते है।

दरअसल, इस गांव का नाम नाखोन फेनम है जहां पर मर्द औरतों के कपड़े पहनते हैं । जिसकी वजह भी बहुत अजीब बताई जा रही है। आपकी जानकारी के अनुसार बता दें​ कि इस गांव के लोग एक विधवा के भूत से डरे हुए हैं जिसके कारण यहां के पुरूष औरतों के कपड़े पहनते हैं। आपको बता दें कि पिछले दिनों इस गांव में 5 लोगों की नींद में मौत हो गई थी। जिसके कारण यहां के पुरूष डरें हुए रहते हैं और उनको मजबूरी में औंरतें के कपड़ें पहनने पड़ते हैं ।

ग्रामीणों का मानना है कि विधवा का भूत गांव के पुरुषों और युवकों को ही अपना शिकार बना रहा है। गांव की औरतों ने अपने पतियों और बेटों को बचाने के लिए उन्हें औरतों के कपड़े पहनाना शुरू कर दिया।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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