स्काइप ग्रुप में सदस्यों की अधिकतम संख्या 50 हुई

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सॉफ्टवेयर कंपनी माइक्रोसॉफ्ट ‘स्काइप ग्रुप कॉल’ पर सदस्यों की अधिकतम संख्या को 25 से बढ़ाकर 50 करने की योजना बना रही है। ‘एनगेजेट’ की शुक्रवार की रिपोर्ट के अनुसार, इस अपडेट के साथ स्काइप बड़े ग्रुप्स में ऑडियो और वीडियो बटन इनेबल कर देगा जिससे यूजर्स अपनी सुविधानुसार अपने माइक्रोफोन्स आसानी से म्यूट कर सकेंगे या अपने वेबकैम ऑन या ऑफ कर सकेंगे।

‘स्काइप वर्जन 8.41.76.55’ में कॉल रिंगिंग फीचर को पूरी तरह वैकल्पिक रखते हुए यूजर्स को इनकमिंग कॉल के बारे में ग्रुप पर सिर्फ नोटीफिकेशन भेजने पर ही पता चल जाएगा।

कंपनी ने एक ब्लॉग में लिखा, “जब आप ग्रुप्स में कॉल करेंगे, तो सभी सदस्यों को रिंग जाने की बजाय उनके पास इसका नोटिफिकेशनजाएगा जिससे उस समय ग्रुप कॉल से जुड़ने में असमर्थ लोगों को व्यवधान ना हो।”

ये फीचर्स सभी प्लेटफॉर्म्स पर बीटा टेस्टर्स के लिए उपलब्ध हैं और जल्द ही इन्हें व्यापक रूप से लाया जाएगा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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