‘द लायन किंग’ हमारी संस्कृति का एक अहम हिस्सा : जॉन फेवरो

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फिल्मकार जॉन फेवरो का ऐसा मानना है कि ‘द लायन किंग’ अब हमारी संस्कृति का एक अहम हिस्सा बन गया है और उनका यह कहना है कि तकनीक के इस्तेमाल के साथ डिजनी के इस वर्ल्ड क्लासिक को दोबारा बनाने के दौरान उन्हें एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी का एहसास हुआ। फेवरो ने एक बयान में कहा, “यह एक ऐसी संपदा है जिससे हम सभी को प्यार है। इसके ओरिजनल एनिमेटेड संस्करण और बाद में ब्रॉडवे म्यूजिकल के साथ डिजनी को अपार सफलता मिली। मैं जानता था कि मुझे इसके साथ बहुत ही सावधान रहने की जरूरत है। यह कहीं से बिगड़ न जाए, इसे लेकर मुझे एक बहुत बड़ी जिम्मेदारी का एहसास हुआ।”

उन्होंने कहा, “मैं यह दिखाना चाहता था कि असाधारण तकनीकों के इस्तेमाल से इसे बनाते वक्त हम मूल विषयवस्तु का सम्मान कर सकें।”

‘द जंगल बुक’ फेम निर्देशक ने साल 1994 में आई वर्ल्ड डिजनी की क्लासिक को फिर से जीवित करने के लिए एक लाइव-एक्शन फिल्म की कल्पना की।

सिम्बा की वास्तविक कहानी को बदले बिना उन्होंने फिल्म निर्माण की कई अनोखी तकनीकों का उपयोग कर इस मशहूर चरित्र को एक नए रू प में वापस लाने का प्रयास किया।

यह फिल्म 19 जुलाई को अंग्रेजी, हिंदी, तमिल और तेलुगू में रिलीज होगी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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