गोल्डन बल्ड ग्रुप होता है सबसे दुर्लभ और खास, दुनियाभर में है सिर्फ इतने लोग

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जयपुर। मनुष्य की बनावट भले ही समान हो लेकिन उनके शरीर में कुछ असमानता पायी जाती है। यही असमानता मनुष्य को आपस में अलग होने का अनुभव करवाती हैै। वैज्ञानिक इस बारे में सबसे पहले बल्ड ग्रुप को अलग करने का जरिया मानते है।

क्योंकि जब किसी व्यक्ति को इसकी आवश्यता होती है,तब इस बात का पता चलता है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि इंसान में उसी इंसान का खून चढ़ सकता है जो उसके खून से पूरी तरह से मेल खाता हो। वैज्ञानिक बताते है कि ए,बी,एबी,ओ… नेगेटिव,पॉजिटिव ऐसे कई रह के बल्ड ग्रुप के बारे में बताते आये है।

लेकिन हाल ही में किये एक सर्वे के अनुसार वैज्ञानिकों ने इन ग्रुप्स के अलावा भी एक और ग्रुप के होने की बात कही जो पूरी दुनिया में बहुत ही कम लोगों के होता है। यह बल्ड ग्रुप होता है, गोल्डन बल्ड ग्रुप। यह बल्ड ग्रुप रेयर माना जाता है, जिसके कारण इसकी कई खासियत भी होती है।

लेकिन कई बार ऐसा भी होता है कि ऐसे बल्ड ग्रुप वाले लोगों को लिए ये ग्रुप मौत का कारण भी बन जाता है। गोल्डन बल्ड ग्रुप आरएच नल के नाम से जाना जाता है। सबसे पहले इस बल्ड ग्रुप का पता 1961 में लगाया गया। शोधकर्ताओं ने इस बल्ड ग्रुप के रेयर होने के कारण ही इसको गोल्डन बल्ड ग्रुप नाम दिया गया।

1961 में ऐसा पहला मामला सामने आया था कि एक आॅस्ट्रलियन महिला के शरीर में यह बल्ड ग्रुप पाया गया था। इस मामले के पहले यह समझा जाता था कि ​कोई भी व्यक्ति आरएच फैक्टर के अभाव में जिंदा नहीं रह सकता है। सर्वे के बाद वैज्ञानिकों का कहना है कि पूरी दुनिया में ऐसे बल्ड ग्रुप वाले लोगों की संख्या मात्र 43 बतायी गई है। जो अपने आप में काफी कम माना जाता है।

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