भय्यूजी महाराज का अंतिम संस्कार आज, अंतिम दर्शन के लिए उमड़ी भीड़

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पारिवारिक तनाव में खुद को गोली मारकर आत्महत्या करने वाले संत और आध्यात्मिक गुरु भय्यूजी महाराज (उदय राव देशमुख) का बुधवार दोपहर बाद अंतिम संस्कार होगा। उनके पार्थिव देह को अंतिम दर्शन के लिए इंदौर के सूर्योदय आश्रम में रखा गया है। भय्यूजी को मुखाग्नि उनकी बेटी कुहू देगी।

भय्यूजी महाराज के पार्थिव देह को बुधवार सुबह सिल्वर स्प्रिंग इलाके में स्थित आवास से सूर्योदय आश्रम ले जाया गया, जहां उनके अनुयायियों की भीड़ उमड़ी हुई है। कतारों में खड़े सैकड़ों लोग उन्हें श्रद्धांजलि दे रहे हैं।

पारिवारिक सूत्रों का कहना है कि भय्यूजी के पार्थिव देह को उनकी बेटी कुहू मुखाग्नि देगी। यह फैसला उनके करीबियों ने लिया है।

गौरतलब है कि भय्यूजी ने मंगलवार को खुद को गोली मारकर आत्महत्या कर ली थी। मौके से मिले सुसाइड नोट में भय्यूजी ने तनाव के चलते आत्महत्या करने का जिक्र किया था।

भय्यूजी की आत्महत्या के बाद जो बातें खुलकर सामने आ रही हैं, उससे पता चल रहा है कि भय्यूजी की बेटी कुहू और उनकी दूसरी पत्नी डॉ.आयुषी के बीच बहुत गहरे मतभेद थे।

उनकी बेटी इस हादसे के लिए डॉ. आयुषी को जिम्मेदार ठहरा रही हैं।

न्यूज स्त्रेात आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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