फिल्म देखने जाने का अनुभव मर रहा है : माइकल बे

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बड़े पर्दे पर अपनी प्रतिभा दिखाने के बाद फिल्मकार माइकल बे डिजिटल दुनिया में अपनी फिल्म ‘6 अंडरग्राउंड’ से धमाल मचाने के लिए तैयार हैं। हालांकि उन्हें इस बात का खेद है कि वह अपनी फिल्म बड़े पर्दे पर रिलीज नहीं कर रहे है। ऐसे में उनका कहना है कि “कुछ मायनों में फिल्म देखने जाने का अनुभव एक तरह से मर रहा है।”

बे ने मीडिया से यहां कहा, “बिल्कुल हमें खेद है। लेकिन मुझे लगता है कि जब आप बड़े सिनेमा से आते हैं तो बड़े इमेजरी के साथ बड़े पैमाने पर एक्शन करते हैं, और मैं फिल्म स्क्रीन की सराहना करता हूं। लेकिन हमारा पूरा कारोबार पिछले तीन-चार वर्षों में बदल गया है, और हमें एक नई दुनिया में जाने की आदत डालनी है।”

उन्होंने आगे कहा, “लोग अब अलग-अलग जरिए से चीजों का उपभोग करते हैं और फिल्म देखने जाने का जो अनुभव होता था, वह एक तरह से मर रहा है।”

‘6 अंडरग्राउंड’ एक सतर्क दस्ते के छह लोगों की कहानी है। ये छह लोग दुनिया में बदलाव लाने के लिए कुख्याज अपराधियों को दबोचने के क्रम में मौत के मुंह में जाने से बाल-बाल बचते हैं।

इस फिल्म में रायन रेनॉल्ड्स, मेलानी लॉरेंट, मैनुएल गार्सिया-रुल्फो, अड्रिया अरजोना, कोरे हाकिंस और बेन हार्डी प्रमुख भूमिकाओं में हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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