माकपा ने कहा, आंख में धूल झोंकना है प्रज्ञा ठाकुर की माफी

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भोपाल से भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) की उम्मीदवार प्रज्ञा सिंह ठाकुर द्वारा महात्मा गांधी के कातिल को देशभक्त बताने के बाद मांगी गई माफी को मार्क्‍सवादी कम्युनिस्ट पार्टी (माकपा) ने शुक्रवार को ‘आंख में धूल झोंकना’ (आईवॉश) बताया।

अपने बयान में माकपा ने कहा, “भाजपा के इशारे पर प्रज्ञा ने जो माफी मांगी है, वह इस बात की पुष्टि करती है कि वह अभी भी अपनी बात पर कायम हैं।”

महात्मा गांधी के हत्यारे नाथूराम गोडसे को ‘देशभक्त’ कहने के बाद प्रज्ञा ठाकुर निशाने पर आ गईं और उनकी व्यापक आलोचना हुई।

बयान में कहा गया, “प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने उन्हें (प्रज्ञा को) ‘भारत की सभ्यता की विरासत का प्रतीक’ बताया था। उन्हें टिकट देकर भाजपा-आरएसएस हिंदुत्व सांप्रदायिक वोट बैंक को मजबूत करने की कोशिश कर रहीं हैं।”

माकपा ने कहा, “यह बात आरएसएस-भाजपा के आतंकवाद, आतंकवाद आरोपी और महात्मा गांधी के हत्यारे के प्रति रवैये को दर्शाती है।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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