अमित शाह की एनआरसी योजना का मक़सद सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करना है

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जयपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह एनआरसी के मुद्दे को लेकर यह बात कह चुके हैं कि वह एनआरसी के चलते किसी भी हिंदू देश हिंदू वासी को देश नहीं छोड़ना पड़ेगा तो एन आर सी का मतलब क्या है कि इस बात को लेकर कई लोगों के मन में सवाल है और सवाल यह भी है कि आखिर भारतीय जनता पार्टी एनआरसी के मुद्दे को किस तरीके से देखती है.

एनआरसी के मुद्दे को लेकर भारतीय जनता पार्टी और आर एस एस के कई नेता यह कह चुके हैं कि इससे किसी भी हिंदू को भारत नहीं छोड़ना पड़ेगा वहीं अमित शाह ने भी कई मौकों पर यह कहा है कि एनआरसी के चलते किसी भी हिंदू जैन सिख को देश छोड़कर नहीं जाना पड़ेगा लेकिन अक्सर यह सभी लोग मुस्लिम समुदाय का नाम लेना भूल जाते हैं या यूं कहें कि नाम नहीं लिया जाता है.

इसके साथ-साथ एक सवाल यह भी खड़ा होता है कि आखिर उन लोगों के साथ क्या किया जाएगा जिन लोगों का नाम एनआरसी में शामिल नहीं है अगर कुछ आंकड़ों की बात करें तो करीब 1400000 लोगों का नाम एनआरसी में शामिल नहीं है लेकिन इनमें से 1200000 लोग हिंदू समुदाय से आते हैं यानी इन्हें तो किसी भी प्रकार से भारतीय जनता पार्टी की सरकार भारत देश छोड़ने के लिए नहीं कहेगी यह बात भी साफ कर चुकी है अब बात करें बचे हुए लोगों की तो उनमें से कई लोग ऐसे हैं जो अपनी नागरिकता को साबित कर सकते हैं इसके अलावा कई लोग ऐसे हैं जो अब इस दुनिया में नहीं रहे हैं यानी कुल मिलाकर यह बात ज्यादा कर कर भी दो लाख से ज्यादा लोगों की नहीं है.

तू लेकिन आखिर सरकार इस मामले को उठाकर और इसे लेकर क्या करना चाहती है तो इसका सिर्फ एक ही जवाब है कि भारतीय जनता पार्टी अपने मुद्दत मतदाताओं का ध्यान वास्तविक मुद्दों से हटाकर इन मुद्दों पर लगाना चाहती है ताकि असल मुद्दे जैसे अर्थव्यवस्था नौकरियों और रोजगार जैसी समस्याओं पर किसी का ध्यान ना जाए पर्यावरण की समस्याओं पर किसी का ध्यान ना जाए और एनआरसी के मुद्दे को लेकर ही सरकार अपने चुनावों में अपना प्रचार प्रसार कर सके.

यानी यह कहा जा सकता है कि अमित शाह और भारतीय जनता पार्टी का मुद्दा एनआरसी को लेकर सिर्फ सांप्रदायिक ध्रुवीकरण करना है और अपने चुनावों में जीत हासिल करना है और इसका एक आम नागरिक के जीवन पर कोई असर नहीं पड़ने वाला है.

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