अनुपस्थित द्रव्यमान समस्या ने ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति में किये कई सवाल खड़े

0
70

जयपुर। डार्क मेटर की खोज आकाशगंगाओं के द्रव्यमान की गणनाओं मे कमी की व्याख्या मात्र नही है। अनुपस्थित द्रव्यमान समस्या ने ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति के सभी प्रचलित सिद्धांतों सवाल खड़ा कर दिया हैं। श्याम पदार्थ का अस्तित्व ब्रह्माण्ड के भविष्य पर गहरा प्रभाव डालता है। ब्रह्मांड की उत्पत्ति को देकर कई संबंध हो सकते है। जैसे 1950 के दशक के मध्य मे ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति का नया सिद्धांत दुनिया के सामने आया था जिसे बिग बैंग नाम दिया गया।

इस सिद्धांत के मुताबिक  ब्रह्माण्ड की उत्पत्ति एक महा-विस्फोट के साथ हुयी होगी। इस सिद्धांत के पीछे आकाशगंगाओं के प्रकाश मे पाया जाने वाला डाप्लर प्रभाव का निरीक्षण किया था। बता दे कि आकाशगंगाओं के दोनो छोरो मे पाया जाने वाला डाप्लर प्रभाव आकाशगंगा का घूर्णन के संकेत देता है औंर इसी तरह से आकाशगंगाओं के केन्द्र के प्रकाश मे पाया जाने वाला लाल विचलन यह दर्शाता है कि वे हमसे दूर जा रही हैं इसका मतलब होता है कि हर दिशा मे ब्रह्माण्ड का विस्तार हो रहा है। महाविस्फोट के सिद्धांत के अनुसार सारा पदार्थ किसी समय एक बिंदु पर संपिड़ीत किया गया था।

इस महाविस्फोट ने सारे पदार्थ को समान रूप से हर दिशा मे वितरित कर दिया। जिसे हम आज विराट ब्रह्मांड के रूप में देखते है। गुरुत्वाकर्षण ने पदार्थों के गुच्छो मे जमा होकर ग्रहों, तारों तथा आकाशगंगाओं का निर्माण किया। गुरुत्वाकर्षण बल के कारण ही करोड़ो आकाशगंगायें ब्रह्मांड में बंधी ही है। और इसी बल से कई ग्रह समूह में रहते है वरना यह यूँ हीं ब्रह्मांड में विचरण करते रहते है और हर सेकंड में एक बड़ा धमाका होता रहता और सारे ग्रह एक दिन धूल के कण बनकर बादलों के रूप में रहते।   

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here