..तो इसलिए महरशला अली ने Taraji P. Henson के साथ अंतरंग सीन करने से किया था इनकार

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ऑस्कर विजेता अभिनेता महरशला अली ने 2008 की फिल्म ‘द क्यूरियस केस ऑफ बेंजामिन बटन’ में भूमिका स्वीकार करते समय केवल एक ही शर्त थी कि उनकी सह-कलाकार टराजी पी.हेंसन के साथ अंतरंग सीन नहीं होना चाहिए। ऐसा उन्होंने इसलिए कहा था क्योंकि यह उनके धर्म के सम्मान से बाहर था।

फीमेल फस्र्ट डॉट को डॉट यूके के मुताबिक अली ने माइंड पॉवर मिक्सटेप पॉडकास्ट पर कहा, “मेरे पुराने एजेंट तो मुझे फोन करके कहा कि महरशला आपको रोल मिल गया है। मैंने कहा कि यदि उसमें सेक्स सीन होगा तो मैं नहीं कर सकता। फाइनल शॉट में टराजी और मैं किस करना शुरू करे हैं और फिर हम फ्रेम से बाहर चले जाते हैं।”

अली ने कहा, “15 साल पहले भी मैं इस पॉइंट तक ही जा सकता था क्योंकि मैं अपने धर्म के सम्मान का स्थान रखना चाहता हूं।”

अभिनेता ने अपने पिता को लेकर बताया, “वह केवल स्पोर्ट्स में नहीं थे। संगीत, कला काफी कुछ था, जिनसे मैं अपने पिता के साथ जुड़ा था। जब उनका निधन हुआ, हम सबसे अच्छे दोस्त की तरह थे। उनके लिए ही मैं कविताएं लिखने से अभिनय की दुनिया में आ गया। जब मेरे पिता बीमार थे तब मैंने परफॉर्म करना शुरू कर दिया था। जब मैंने न्यूयॉर्क के लिए बाहर जाना शुरू किया, तो मैं उनके लिए मैं छोटे-छोटे परफॉर्मेंस करता था। कुछ समय बाद ही उनका निधन हो गया।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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