थाईलैंड : गुफा में फंसे बच्चों को बचाने में गोताखोर की मौत

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थाईलैंड की एक गुफा में फंसे 12 बच्चों और उनके कोच को बचाने के अभियान में लगे पूर्व नौसेना गोताखोर की शुक्रवार को मौत हो गई। समान गुनान (38) थाम लुआंग गुफा परिसर में बच्चों के लिए जरूरी सामान की आपूर्ति कराने के बाद लौटते वक्त बेहोश हो गए और उन्हें होश में नहीं लाया जा सका।

अधिकारी ने कहा, “उनका काम ऑक्सीजन की आपूर्ति करना था लेकिन लौटते वक्त खुद उसके पास पर्याप्त ऑक्सीजन नहीं बची।” इस गोताखोर ने नौसेना छोड़ दी थी लेकिन वह बचाव अभियान का हिस्सा बनने के लिए लौटा था।

चियांग राय के उप गवर्नर पासाकोर्न बूनयालक ने संवाददाताओं से कहा, “पूर्व सील सदस्य जो स्वेच्छा से इस अभियान से जुड़ा ता, उसकी आज तड़के लगभग दो बजे मौत हो गई।”

गुनान धावक और साइकलिस्ट थे। थाईलैंड की अंडर 16 फुटबॉल टीम के 12 बच्चे और उनके 25 वर्षीय कोच 23 जून से लापता हैं। ऐसा अनुमान है कि उन्होंने भारी बारिश की वजह से गुफा में शरण ली थी और बारिश की वजह से गुफा का प्रवेश द्वारा अवरुद्ध हो गया। इन बच्चों की उम्र 11 से 16 साल के बीच है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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