टेटे : प्राप्ती, दीपित बने जूनियर चैम्पियन

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दीपित राजेश पाटील और प्राप्ती सेन ने यहां शानदार प्रदर्शन करते हुए क्रमश: लड़कों एवं लड़कियों के जूनियर वर्ग में नेशनल रैंकिंग (साउथ जोन) टेबल टेनिस चैम्पियनशिप का खिताब अपने नाम कर लिया। यहां डीआरएम म्यूनिसिपल इंडोर हॉल में रविवार को खेले गए मुकाबले में दीपित को 22000 और प्राप्ती को 19800 रुपये की ईनामी राशि मिली।

दीपित ने फाइनल में रीगन अल्बुकुर्क को 4-3 से और प्राप्ती ने मध्य प्रदेश की अनुष्का कुटुंबले को मात देकर खिताब अपने नाम किया। लड़कियों के जूनियर वर्ग में ही टॉप सीड महाराष्ट्र की स्वातिष्का घोष आठवीं सीड निकिता सरकार से क्वार्टरफाइनल में 1-4 से हार गईं।

इसके अलावा तीसरी सीड उत्तर प्रदेश की राधाप्रिया गोयल को दूसरे दौर में दिल्ली की लक्षिता नारंग से 0-3 से मैच गंवाना पड़ा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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