टेटे : साथियान आस्ट्रियन ओपन से बाहर

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भारत के टेबल टेनिस खिलाड़ी जी. साथियान को यहां जारी आईटीटीएफ वल्र्ड टूर प्लेटिनम आस्ट्रियन ओपन-2018 में प्री-क्वार्टर फाइनल में वर्ल्ड नंबर-2 चीन के जिन जू से हार का सामना करना पड़ा। एकल ड्रा में शामिल एकमात्र भारतीय, साथियान को इस एलीट प्लेटिनम टूर्नामेंट के अंतिम-16 में शुक्रवार रात जिन से 1-4 से शिकस्त खानी पड़ी।

भारतीय खिलाड़ी पहला गेम 1-11 से हारने के बाद लय खो बैठे और फिर वह वापसी नहीं कर सके।

साथियान ने तीसरे गेम 11-7 से जीतकर वापसी की कुछ उम्मीदें जगाई लेकिन जिन ने अगले दो गेम 11-2 और 11-4 से जीतकर मैच अपने नाम कर लिया।

वर्ल्ड नंबर-35 ने इससे पहले एक बड़ा उलटफेर करते हुए वल्र्ड नम्बर-16 पुर्तगाल के मार्कोस फ्रीटास को 4-3 से हराकर अंतिम-16 में प्रवेश किया था।

न्यूज स्त्रेात आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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