टेनिस : विपाश फेनेस्ता ओपन के सेमीफाइनल में

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विपाशा मेहरा ने गुरुवार को शानदार प्रदर्शन करते हुए फेनेस्ता ओपन के लड़कियों के अंडर-16 वर्ग के सेमीफाइनल में जगह बना ली है। वहीं लड़कों के अंडर-16 वर्ग में डेनिम यादव अंतिम-4 में पहुंचने में सफल रहे हैं। तमिल नाडु की विपाशा ने टॉप सीड भक्ती परवानी को तीन सेट तक चले क्वार्टर फाइनल मुकाबले में 0-6, 6-0, 6-4 से मात देकर अगले दौर का सफर तय किया।

मैच के बाद उन्होंने कहा, “यह शानदार मैच रहा, खासकर पहला राउंड। मुझे नहीं लगा था कि पहले सेट में मैं पांच अंक भी हासिल कर पाऊंगी। मैंने हालांकि दूसरे दौर में अपने आप पर ध्यान दिया और दोबार शुरुआत की। मैंने धीरे-धीरे अपना खेल खेलना शुरू किया और इसके बाद तीसरा सेट मेरे लिए मानसिक तौर पर काफी आसान रहा।”

एक अन्य क्वार्टर फाइनल में सुकृति दामेर ने चौथी सीड बेला तामहांकर को 6-2, 6-2 से मात दी।

लड़कों के वर्ग में दिवेश गहलोत ने नरेश बाडगुजर को 4-6, 6-1, 6-1 से हराया। डेनिम यादव ने सुशांत दबास को 6-3, 2-6, 6-4 से परास्त कर सेमीफाइनल में प्रवेश किया।

मैच के बाद डेनिम ने कहा, “मुझे यह मैच जीतकर काफी अच्छा लग रहा है। मैं तीसरे सेट में 0-4 से पीछे था वहां से मैंने वापसी करते हुए 6-4 से जीत हासिल की। मैं पहली बार नेशनल चैम्पियनशिप के सेमीफाइनल में खेलूंगा। कल के मैच के लिए तैयार हूं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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