Tennis : ओरलांडो ओपन के फाइनल में हारे गुणनस्वेरन

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भारत के पुरुष टेनिस खिलाड़ी प्रजनेश गुणनस्वेरन को ओरलांडो ओपन के फाइनल में हार का सामना करना पड़ा। चौथी सीड प्रजनेश को अमेरिका को ब्रैंडन नाकाशीमा के हाथों 3-6, 4-6 से हार का सामना करना पड़ा।

31 साल के प्रजनेश को पिछले एक सप्ताह में लगातार दूसरी बार किसी टूर्नामेंट के फाइनल में हारकर उपविजेता से संतोष होना पड़ा है। उन्हें पिछले सप्ताह ही कैरी चैलेंजर के फाइनल में भी हारकर उपविजेता से संतोष करना पड़ा था।

अपने इस प्रदर्शन के बाद प्रजनेश एटीपी टूर रैकिंग में 137 वें स्थान से 128वें स्थान पर पहुंच गए हैं। भारतीय रैंकिंग में उन्होंने सुमित नागल को खिसकाकर पुरुष एकल रैंकिंग में शीर्ष स्थान हासिल कर लिया है।

इस बीच, 19 साल के नाकाशामी चैलेंजर खिताब जीतने वाले सबसे युवा अमेरिकी खिलाड़ी बन गए हैं। उनसे पहले अमेरिका के फ्रांसिस टियाफोए ने 2017 में सबसे कम में चैलेंजर खिताब जीता था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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