टेनिस : शंघाई मास्टर्स के सेमीफाइल में पहुंचे फेडरर

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मौजूदा चैम्पियन स्विट्जरलैंड के अनुभवी टेनिस खिलाड़ी रोजर फेडरर ने शुक्रवार को एक हाई वोल्टेज क्वार्टर फाइनल मुकाबले में जापान के केई निशिकोरी को हराकर यहां जारी शंघाई मास्टर्स टूर्नामेंट के सेमीफाइनल में प्रवेश कर लिया। बीबीसी की रिपोर्ट के अनुसार, टॉप सीड फेडरर ने पहले सेट में 1-4 से पिछड़ने के बाद शानदार वापसी करते हुए वर्ल्ड नंबर-12 निशिकोरी को 6-4, 7-6 से मात दी। सेमीफाइनल में शनिवार को फेडरर का सामना क्रोएशिया के बोर्ना कोरिक से होगा।

कोरिक ने इस साल हाले फाइनल में 20 बार के ग्रैंड स्लेम विजेता फेडरर को हराया था। उन्होंने यहां एक अन्य क्वार्टर फाइनल में आस्ट्रेलिया के मैथ्यू एब्डेन को 7-5, 6-4 से हराकर सेमीफाइनल में कदम रखा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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