राज्यसभा में तेदेपा, अन्नाद्रमुक का हंगामा, कार्यवाही 2 बजे तक स्थगित

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संसद के ऊपरी सदन राज्यसभा में गुरुवार को तेदेपा और अन्नाद्रमुक के सदस्यों ने विभिन्न मुद्दों को लेकर जोरदार हंगामा किया। शोर शराबे के बीच सभापति एम. वेंकैया नायडू ने सदन की कार्यवाही अपराह्न् दो बजे तक के लिए स्थगित कर दी।

सुबह जैसे ही सदन की बैठक शुरू हुई, कुछ नव-निर्वाचित सदस्यों ने पद की शपथ ली।

सदन के पटल पर दस्तावेज रखे जाने और मंत्रियों के बयानों के बाद तेदेपा सदस्य ‘आंध्र प्रदेश बचाओ’ जैसे नारे लगाते हुए सभापति के आसन के पास एकत्रित हो गए।

अन्नाद्रमुक सदस्य कावेरी प्रबंधन बोर्ड के गठन की मांग को लेकर हंगामा करने लगे।

इसी बीच, टीएमसी सदस्य शुखेंदु शेखर रॉय ने बुधवार को केंद्रीय मंत्री जितेंद्र सिंह द्वारा भ्रष्टाचार निवारण (संशोधन) विधेयक 2013 पेश करने पर व्यवस्था का प्रश्न उठाया और इसे वापस लेने की मांग की।

नायडू ने कहा कि इसमें जरूरी सुधार किए जाएंगे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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