टीसीएस ने जेडीए सॉफ्टवेयर से की भागीदारी

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भारतीय आईटी दिग्गज टाटा कंसल्टेंसी सर्विसेज (टीसीएस) ने सोमवार को जेडीए सॉफ्टवेयर के साथ वैश्विक भागीदारी की घोषणा की, ताकि दुनिया भर के ग्राहकों की आपूर्ति श्रंखला को मजबूत करने के लिए अगली पीढ़ी के कॉगनिटिव समाधानों का निर्माण कर सके। टीसीएस ने कहा कि इस भागीदारी का लक्ष्य भविष्य की आपूर्ति श्रंखलाओं के लिए संयुक्त, अंतर-तकनीकी समाधान विकसित करना है।

टीसीएस के उपाध्यक्ष और वैश्विक प्रमुख (एलाएंस एंड टेक्नॉलजी यूनिट) रमन वेंकटरमन ने एक बयान में कहा, “टीसीएस के उन्नत और डिसरप्टिव कारोबार 4.0 डिजिटल टेक्नॉलजीज और गहरी विशेषज्ञता का जेडीए के एंड-टू-एंड आपूर्ति श्रंखला और रिटेल समाधानों के साथ गठजोड़ से हम हमारे ग्राहकों की आपूर्ति श्रंखला को सामूहिक रूप से सुदृढ़ करेंगे, जिससे वे उत्पाद की मांग को इंटेलीजेंट तरीके से पूरा कर सकें, नए कारोबारी मॉडल, क्षमता और मूल्य प्रस्तावों की पहचान कर सकें।”

इस समाधानों का लक्ष्य मनुष्य-मशीन भागीदारी को बढ़ावा देना है, ताकि जटिल कारोबारी समस्याओं का तेजी से समाधान किया जा सके, उत्पादकता में कई गुना का सुधार किया जा सके और ग्राहक अनुभव को बदला जा सके।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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