टाटा स्टील कोलकाता 25 किलोमीटर रन में दावेदारी पेश करेंगे साब्ले, सुरिया

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कोलकाता में आयोजित होने वाली टाटा स्टील कोलकाता 25 किलोमीटर रन में मौजूदा विजेता और कोर्स रिकॉर्ड धारक अविनाश साब्ले पुरुष वर्ग में दावेदारी पेश करते हुए नजर आएंगे। इसके अलावा 16 दिसम्बर को आयोजित होने वाली इस रन में महिला वर्ग में आईएएएफ एथलीट एल. सुरिया दावेदारी पेश करेंगी।

पिछले साल इस रन के 24वें संस्करण में साब्ले ने एक घंटे, 15 मिनट और 17 सेकेंड का समय लेकर कोर्स रिकॉर्ड बनाते हुए खिताबी जीत हासिल की थी। उनके साथ कालिदास हिरावे और अभिषेक पाल भी प्रतिस्पर्धा करेंगे।

पिछले साल महिला वर्ग में खिताब जीतने वाली सुरिया ने एक घंटे, 26 मिनट और 53 सेकेंड में पूरा किया था। इस वर्ग में उन्हें एशियाई खेलों की पदक विजेता सुधा सिंह और मोनिका अथारे प्रतिस्पर्धा देंगी।

टाटा स्टील कोलकाता 25 किलोमीटर रन में पहली बार विजय दिवस मनाया जाएगा। 1971 में पाकिस्तान के खिलाफ मिली जीत के रूप में मनाया जाता है।

इसके अवसर पर भारतीय सैना, नौ सेना और वायुसेना के जवानों के लिए विजय दिवस ट्रॉफी का आयोजन किया जाएगा। इस बार चैरिटी के लिए टाटा स्टील कोलकाता 25 किलोमीटर रन ने 37 लाख रुपये जुटा लिए हैं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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