लोनावाला में अपने पिता के साथ ट्रेकिंग पर गए तनुज विरवानी

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अभिनेता तनुज विरवानी काम के सिलसिले में यूएई लौटने से पहले जितना संभव हो सके अपने पिता के साथ ज्यादा से ज्यादा वक्त बिता रहे हैं। तनुज हाल ही में अपने पिता के साथ लोनावाला में अपने फार्महाउस में ड्राइव कर गए। इस दौरान दोनों ने साथ में काफी अच्छा वक्त भी बिताया। दोनों ने साथ में खाना पकाया और वॉक पर भी गए। लोनावला में दोनों ने मिलकर दिन भर ट्रेकिंग का भी आनंद लिया।

अपने शो ‘इनसाइड एज 3’ की रिलीज का बेसब्री से इंतजार कर रहे तनुज ने कहा, “मेरे पिता मेरे जानने वाले सबसे फिट इंसानों में से एक हैं। उन्हें घूमना और आउटडोर एक्टिविटी करने में बेहद मजा आता है इसलिए हमने ट्रेक करने और लोनावाला के खूबसूरत इलाकों को देखने का फैसला लिया। मैं अपने पिता को लेकर थोड़ा चिंतित था क्योंकि ट्रेकिंग में बहुत ज्यादा फिटनेस की आवश्यकता होती है, लेकिन वह एक सरप्राइज पैकेज हैं।”

छुट्टियों के बाद वह ‘सेवेंथ सेंस’ और ‘लाइन ऑफ फायर’ की शूटिंग के लिए संयुक्त अरब अमीरात वापस लौट जाएंगे।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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