इनसे लीजिए प्रेरणा, पति-पत्नी चाय बेचकर घूम चुके हैं 23 देश

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दोस्तों, वैसे तो भारत में अलग-अलग तरह के लोग रहते हैं. वैसे तो ये देश तरह-तरह के धर्म, जाति, बोली, कल्चर, परम्परा और भी ना जाने किन-किन सामाजिक विविधताओं को समेटे हुए है। आज हम आपको एक ऐसे चाय वाले कपल के बारे में बताने जा रहे हैं जो कि चाय बेचकर अब तक करीब 23 देशों की सैर कर चुका है ।

बताया जा रहा है कि यह जोडा केरल में रहता है जो कि चाय की दुकान लगाता है । बता दें कि इनका नाम विजयन और मोहाना है । विजयन 68 साल के हैं, जबकि मोहाना की उम्र 67 साल है और इनकी चाय की दुकान का नाम है श्री बालाजी कॉफी हाउस । विजयन और मोहाना रात-दिन मेहनत करते हैं । बताया जा रहा है कि ये बुजुर्ग दंपति रोजाना जो भी कुछ कमाता है उसमें से करीब 300 रूपए बचाता है ताकि उसको वो घूमने पर खर्च कर सके ।

अब तक इनकी शादी को करीब 45 साल हो चुके है और दोनों को ही घूमने का शौक है । इस जोड़ा की पसंदीदा जगहों में सिंगापुर, स्विट्जरलैंड और न्यूयॉर्क हैं । चाय बेचकर दुनिया के एक से दूसरे कोने तक घूमने वाले इस जोड़े पर एक फिल्म भी बन चुकी है । इस फिल्म का नाम ‘इनविजिबल विंग्स’ है।

 


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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