तब्लीगी तिलिस्म : खाली पड़े जमात मुख्यालय को बार-बार खंगालने पहुंच रही क्राइम ब्रांच!

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निजामुद्दीन बस्ती स्थित मरकज तब्लीगी जमात मुख्यालय का तिलिस्म कथित लाख कोशिशों के बाद भी टूटने का नाम नहीं ले रहा है। कोरोना के कोहराम में तब्लीगी जमात मुख्यालय की करतूतों का भांडा फूटने के बाद भी पुलिस का वही पुराना हाल है। जमात मुख्यालय में कोरोना जैसी महामारी कथित रूप से पाली जा रही थी, और यह सब जानते हुए भी दक्षिण-पूर्वी दिल्ली जिले के निजामुद्दीन थाने की पुलिस कान में तेल डाले सोती रही।

जमाती निजामुद्दीन थाने के मुंह (मुख्य द्वार) पर बसें खड़ी करके जमात मुख्यालय में मजमा लगाने पहुंचते रहे। तब्लीगी मुख्यालय का तिलिस्म तोड़ने के नाम पर दिल्ली पुलिस अपराध-शाखा की टीमें कथित तमाशाबाजी से बाज नहीं आ रही हैं। जब से दिल्ली दमकल और स्वास्थ्य विभाग की टीमों ने साफ-सफाई, सेनेटाइज करके जमात मुख्यालय को छोड़ा है, तकरीबन बे-नागा दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच की टीमें यहां पहुंच रही हैं।

मामले की जांच कर रही क्राइम ब्रांच टीम के डीसीपी जॉय टिर्की रोजाना एक-दो सहायक पुलिस आयुक्त (एसीपी), दो-चार इंस्पेक्टर-दारोगा, हवलदार-सिपाहियों को कोरोना से बचाव की ड्रेस पहनाकर यहां ला-ले जा रहे हैं। डीसीपी साहब के हुक्म तामीली के चक्कर में फंसे बेचारे एसीपी-दारोगा पड़ताल के नाम पर घंटों इस वीरान-सूने पड़े मरकज तब्लीगी जमात मुख्यालय की नौ-मंजिलों में ऊपर-नीचे घूम-फिर कर लौट जा रहे हैं।

तब्लीगी मुख्यालय मामले में दिल्ली पुलिस के संबंधित आला अफसरों की चुप्पी इस सब की चश्मदीद है। अगर वाकई दिल्ली अपराध शाखा जांच कर रही है तो फिर उसे चार दिन में अभी तक आखिर मिला कुछ क्यों नहीं है? अगर पड़ताल के दौरान पुलिस को कुछ मिला है तो फिर वह जमाने के सामने जांच जारी है की आड़ लेकर पड़ताल की हकीकत खोलने में क्यों शरमा-कतरा रही है?

सूत्रों के मुताबिक, यह शोरगुल भी महज एक फरेब ही है कि मौलाना साद कहीं गायब हो गए हैं या फिर फरार मौलाना साद को तलाशने में पुलिस को पसीना आ गया है। दिल्ली पुलिस के ही सूत्रों और खुफिया जानकारियों के मुताबिक, वांछित चल रहे मौलाना मो. साद कांधलवी कहीं फरार नहीं हैं। दिल्ली पुलिस अपराध शाखा और मौलाना साद के सिपहसलार सब एक-दूसरे के लगातार संपर्क में हैं। न मौलाना गायब हैं, न ही दिल्ली पुलिस क्राइम ब्रांच का लाव-लश्कर मौलाना को तलाशने में पसीना न्योछावर कर रहा है।

“मौलाना कहीं भागे नहीं हैं। वह किसी न किसी तरह से पुलिस के संपर्क में हैं। मौलाना साद ने चोरी नहीं की है, जो पुलिस से भागेंगे। वक्त आने पर सब बात सामने आकर मौलाना साहब पुलिस को तफसील से बताएंगे।” यह बात मौलाना मो. साद कांधलवी के ही विश्वासपात्र ने आईएएनएस से दो दिन पहले फोन पर कही थी। ऐसे में दिल्ली पुलिस अपराध शाखा कारिंदों का रोज-रोज कोरोना बचाव की ड्रेस पहन कर खाली मरकज मुख्यालय खंगालने पहुंच जाना, किधर इशारा करता है? हर कोई समझ सकता है।

दो दिन पहले आईएएनएस ने यूपी के शामली जिले में स्थित कांधला थाने के कोतवाल इंस्पेक्टर कर्मवीर सिंह से फोन पर बात की। एक सवाल के जबाब में उन्होंने कहा था, “मेरे इलाके में मौलाना मोहम्मद साद कांधलवी का एक बड़ा फार्म हाउस है। लेकिन मौलाना साद को वहां कभी देखा नहीं गया। हम लोग रुटीन जांच में लॉकडाउन के दौरान भी भीड़ पर ड्रोन कैमरों से नजर रख रहे हैं। मौलाना साद की बात छोड़िये उनकी परछाई तक हमें ड्रोन वीडियो में नहीं दिखाई दी।”

जाहिर सी बात है कि अगर वास्तव में दिल्ली पुलिस से मौलाना दूर होते, हकीकत में दिल्ली पुलिस मौलाना साद को पकड़ने के लिए व्याकुल होती तो वह कांधला पुलिस से जरूर मदद मांगती। आईएएनएस के एक सवाल के जबाब में कोतवाल इंस्पेक्टर कांधला ने कहा, “नहीं, दिल्ली पुलिस ने अभी तक हमसे कोई मदद नहीं मांगी है मौलाना मो. साद कांधलवी के बारे में।”

ऐसे में सवाल उठना लाजिमी है कि क्या वाकई मौलाना साद दिल्ली पुलिस की रेंज में हैं? अगर हां तो फिर क्राइम ब्रांच की टीमें रोजाना कोरोना लिबास पहन कर वीरान मरकज तब्लीगी जमात मुख्यालय में जाकर वक्त खराब क्यों कर रही हैं? अगर मौलाना दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की हद से बाहर निकल चुके हैं तो फिर पुलिस ने अभी तक आसपास के उन राज्यों की पुलिस को अलर्ट जारी क्यों नहीं किया है, जहां मौलाना के छिपने के संभावित ठिकाने हो सकते है?

जानकारी के मुताबिक, अपराध शाखा के डीसीपी कहने देखने को दल-बल के साथ मंगलवार को भी सूने वीरान जमात मुख्यालय पहुंचे थे। लेकिन सवाल फिर वही कि जब मौलाना पुलिस की हद से दूर नहीं हैं और मरकज तब्लीगी मौलाना साद व उनके शागिर्दों शुभचिंतकों द्वारा कथित रूप से खाली किया जा चुका है, तो फिर पुलिस मरकज हेडक्वार्टर में जाकर वक्त खराब क्यों कर रही है?

हाल ही में मीडिया में खबरें आईं कि मौलाना मो. साद हरियाणा के मेवात में छिपे हो सकते हैं। मेवात तब्लीगियों का बड़ा अड्डा है। जबकि मौलाना मो. साद ने अपने बेटे मो. यूसुफ के जरिए दिल्ली पुलिस अपराध शाखा को नोटिस का जबाब भिजवा दिया। इससे भी साफ है कि मौलाना मो. साद जहां भी हैं, हर हाल में दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की नजरों में हैं। फिर मौलाना की तलाश, पड़ताल या फिर तब्लीगी जमात का तिलिस्म तोड़ने के नाम पर दिल्ली पुलिस अपराध शाखा की आखिर इस कदर की तमाशेबाजी क्यों?

देश की राजधानी दिल्ली में मंगलवार को दिन भर चर्चा रही कि मौलाना मो. साद कांधलवी हरियाणा के मेवात-नूंह न जाकर उत्तर प्रदेश की सीमा में पहुंच गए हैं। हालांकि आईएएनएस से फोन पर हुई बातचीत में उत्तर प्रदेश पुलिस एसटीएफ के आला अफसर ने साफ कहा, “नहीं, फिलहाल अभी तक तो दिल्ली पुलिस ने हमसे कोई मदद नहीं मांगी है। आगे सबकुछ दिल्ली पुलिस पर निर्भर करेगा। हम अपने राज्य में छिपे दिल्ली के निजामुद्दीन मरकज तब्लीगी जमात मुख्यालय से गायब तब्लीगियों की तलाश में जुटे हैं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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