गणपति दर्शन करने गई स्वरा भास्कर की चप्पलें हुईं चोरी

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यहां के लालबागचा राजा गणपति के पंडाल में बप्पा के दर्शनों के लिए आई ‘वीरे दी वेडिंग’ फिल्म की अभिनेत्री स्वरा भास्कर की चप्पलें चोरी हो गईं। इसे मजाकिया मोड़ देते हुए उन्होंने कहा कि उन्हें अपनी सच्ची भक्ति दिखाने का मौका मिला है। लालबागचा राजा पंडाल में अपने अनुभवों को साझा करने के लिए उन्होंने ट्विटर का सहारा लिया।

जब वह दर्शनों के लिए जा रही थी, तब उन्होंने पैरों पर कोहलापुरी चप्पलें पहनी हुई थीं, लेकिन वापस आते वक्त उन्हें वह नहीं मिली, जिसके बाद उन्हें नंगे पैर वापस आना पड़ा।

एक वीडियो को पोस्ट करते हुए उन्होंने लिखा, “आप लालबागचा राजा गणपति के पंडाल में दर्शनों के लिए जाओ और आपके जूते चप्पलें चोरी न हो तो ऐसे दर्शनों का क्या लाभ? हैशटैग सच्चे भक्त।”

वीडियो में स्वरा को नंगे पैर अपनी कार में वापस आते देखा जा सकता है। काम की बात करें तो वह फराज आरिफ अंसारी के एलजीबीटीक्यू ड्रामा ‘शीर कोरमा’ में दिखाई देंगी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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