स्वप्ना बर्मन की हो सकती है सर्जरी : कोच

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एशियाई खेलों में हेप्टाथलन का स्वर्ण पदक जीतने वाली स्वप्ना बर्मन को पीठ की सर्जरी की जरूरत पड़ सकती है। स्वप्ना के कोच सुभाष सरकार ने शुक्रवार को यह जानकारी दी।

सुभाष ने यहां भारतीय खेल प्राधिकरण (साई) के सम्मान समारोह से इतर कहा, “सर्जरी से इनकार नहीं किया जा सकता। वह 2019 में किसी बड़े टूर्नामेंट में हिस्सा नहीं लेंगी। उन्हें पहले पूरी तरह से ठीक होना है।”

एशिया खेल शुरू होने से पहले स्वप्ना को दांत व मसूड़े और पीठ में दर्द की शिकायत थी। इसके बावजूद उन्होंने स्वर्ण पदक जीता था। वह शुक्रवार को शहर लौट आइर्ं जहां उनका भव्य स्वागत हुआ, लेकिन उन्हें बुखार था। 21 साल की स्वप्ना 2014 में इंचियोन एशियाई खेलों में भाग लेने के बाद से ही पीेठ की चोट से जूझ रही हैं।

चोट के अलावा उन्हें वित्तीय बाधाओं से भी जूझते रहना पड़ा है। उनके पिता पंचानन बर्मन एक रिक्शा चालक हैं जबकि माता बासना देवी चाय बागान में काम करती है।

स्वप्ना ने कहा, “यह काफी भावनात्मक बात होगी क्योंकि मैं एक साल से भी ज्यादा समय बाद अपने परिवार से मिलूंगी (आखिरी बार वह पिछले साल जुलाई में भुवनेश्वर में हुए एशियाई एथलेटिक्स में स्वर्ण जीतने के बाद घर गई थीं)। मेरी मां हमेशा पूछती है ‘तुई भालो अचिस तो’ (उम्मीद है कि तुम अच्छी होगी)। मैं उन्हें बहुत याद कर रही हूं।”

स्वप्ना और उनके कोच, डॉक्टर अनंत जोशी तथा अन्य डॉक्टरों से मिलने के लिए अब मुंबई जाएंगे ताकि उनकी चोट की सही से जांच हो सके।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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