स्वामी परिपूर्णानंद भाजपा में शामिल

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आंध्रप्रदेश स्थित श्री पीठक के महंत, स्वामी परिपूर्णानंद शुक्रवार को भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) में शामिल हो गए। इस मौके पर भाजपा अध्यक्ष अमित शाह उपस्थित थे।

परिपूर्णानंद ने भाजपा में शामिल होने के बाद कहा, “मैं प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमित शाह का आभारी हूं। मैं बगैर किसी उम्मीद के पार्टी का सदस्य बना हूं। मैं देश और अपने धर्म के लिए काम करूंगा। अब मैं भाजपा का एक कार्यकर्ता हूं और एक कर्मयोगी की तरह काम करूंगा।”

शाह ने स्वामी परिपूर्णानंद का स्वागत करते हुए कहा कि इससे दक्षिणी राज्यों में भाजपा की संभावनाएं बढ़ेंगी, खासतौर से आंध्रप्रदेश और तेलंगाना में।

उन्होंने कहा, “तेलंगाना में हमारी जीत की संभावना बढ़ गई है। वह तेलंगाना में पार्टी के लिए प्रचार करेंगे।”

स्वामी परिपूर्णानंद को अन्य समुदायों के खिलाफ कथित तौर पर भड़काऊ बयान देने के लिए जुलाई में हैदराबाद से छह माह के लिए निर्वासित कर दिया गया था। हैदराबाद उच्च न्यायालय ने हालांकि अगस्त में इस निर्वासन को समाप्त कर दिया।

न्यूज स्त्रो आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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