भाजपा कार्यालय के बाहर स्वामी अग्निवेश पर हमला

0

भाजपा मुख्यालय के बाहर शुक्रवार को सामाजिक कार्यकर्ता स्वामी अग्निवेश पर हमला किया गया। यह हमला उस समय किया गया, जब स्वामी अग्निवेश यहां पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी को श्रद्धांजलि देने आए थे। भाजपा मुख्यालय में वाजपेयी का पार्थिव शरीर श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए रखा गया है।

स्वामी अग्निवेश के दीन दयाल उपाध्याय मार्ग पर स्थल पर पहुंचने के तुंरत बाद कुछ लोगों ने उनके खिलाफ नारेबाजी करते हुए उन्हें वापस जाने को कहा। समाचार चैनल द्वारा प्रसारित कुछ फुटेज में उन्हें भागते हुए और कुछ लोगों द्वारा उनका पीछा करते देखा जा सकता है। ऐसा माना जा रहा है कि ये भारतीय जनता पार्टी के कार्यकर्ता हैं।

इसके बाद दिल्ली पुलिस ने अग्निवेश को गाड़ी में बैठा लिया और उन्हें सुरक्षित ले गई। अग्निवेश पर हाल में झारखंड के पाकुड़ जिले में एक गांव में सार्वजनिक कार्यक्रम में भाग लेने के लिए जाते हुए हमला किया गया था। यह हमला कथित तौर पर भाजपा के युवा मोर्चा व एबीवीपी कार्यकर्ताओं ने किया था।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleनपुंसकता को जड़ से खत्म करना है तो ये नुस्खा जरूर अपनायें, पुरुष जरूर पढ़ें
Next articleIndia vs Pakistan: स्वतंत्रता दिवस की बेहतरीन तस्वीरें
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here