मीटू’ पर बोलीं सुष्मिता, पीड़ितों की आवाज सुने समाज

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बॉलीवुड अभिनेत्री सुष्मिता सेन का कहना है कि यौन उत्पीड़न के खिलाफ ‘मीटू’ अभियान तभी काम करेगा, जब लोग पीड़ितों की आवाज सुनेंगे। सामाजिक मुद्दों पर बेबाक राय रखने के लिए लोकप्रिय सुष्मिता ने आईएएनएस को दिए बयान में यह बात कही।

सुष्मिता ने कहा, “भले ही इस अभियान को पश्चिमी देशों से लिया गया हो, लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि हम इसे नजरअंदाज कर दें। यह देखकर बेहद अच्छा लग रहा है कि महिलाएं आगे आकर अपने शोषण के खिलाफ आवाज उठा रही हैं।”

अभिनेत्री ने कहा, “समाज का हिस्सा होने के नाते लोगों को पीड़ितों की कहानियां सुननी चाहिए न कि उन्हें आंकना चाहिए। उन्हें नजरअंदाज करने के बजाए प्रेरित किया जाए। यह अभियान तब ही काम करेगा, जब हम पीड़ितों की बात सुनना शुरू करेंगे।”

सुष्मिता राजधानी दिल्ली में गुरुवार को लोटस मेक-अप इंडिया फैशन वीक में डिजाइनर भूमिका और ज्योति के लिए शोस्टापर के रूप में हिस्सा लेने के लिए मौजूद थीं।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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