सूर्यकुमार और तारे ने लांच की टेबल्ज गो स्पोर्ट स्टोर्स

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इंडियन प्रीमियर लीग (आईपीएल) में रिकॉर्ड चार बार खिताब जीतने वाली मुंबई इंडियंस के सलामी बल्लेबाज सुर्यकुमार यादव और आदित्य तारे ने शनिवार को यहां टेबल्ज गो स्पोर्ट स्टोर्स लांच की।

भारत के इस पहले स्टोर्स की शुरूआत यहां सीवूड्स ग्रैंड सेंट्रल मॉल में की गई। इस ब्रांड के तहत अब विभिन्न प्रकार की विविध खेल ब्रांड एक ही छत के नीचे उपलब्ध होंगे। टेबल्ज गो स्पोर्ट स्टोर्स लांच के अवसर मुंबई इंडियंस के बल्लेबाज सुर्यकुमार और तारे भी मौजूद थे।

मुंबई में इसकी शुरुआत होने के बाद टेबल्ज ने अब इस साल के अंत तक बंगलुरू और अन्य महानगरों में भी गो स्टोर्स शुरू करनें की योजना बनायी गई है।

इस अवसर पर टेबल्ज के व्यवस्थापक संचालक अदीब अहमद ने कहा “युवा खिलाड़ीयों की कुशलता को सहयोग देते हुए हम यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि भविष्य के खिलाड़ियों को प्रोत्साहन मिल सके। गो स्पोर्ट के माध्यम से हम भारत के हर एक व्यक्ति को सहभागी होने के लिए प्रोत्साहित और फिट रहने में उनकी मदद करे रहे हैं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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