सुप्रीम कोर्ट ने सांसद/विधायक को अयोग्य ठहराने पर दिया सुझाव

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को कहा कि संसद को अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला करने के लिए स्पीकर को विशेष शक्तियां देने के औचित्य पर विचार करना चाहिए। इस टिप्पणी का कर्नाटक विधायकों को अयोग्य करार देने की पृष्ठभूमि में खासा महत्व है। इस पर बीते साल शीर्ष कोर्ट द्वारा फैसला किया गया था।

न्यायमूर्ति आर.एफ. नरीमन की अगुवाई वाली तीन सदस्यीय पीठ ने इस प्रक्रिया में अधिक निष्पक्षता लाने पर जोर देते हुए कहा कि संसद सांसदों और विधायकों के खिलाफ अयोग्यता याचिकाओं को तय करने के लिए स्पीकर के पास विशेष शक्तियां देने की बजाय एक स्वतंत्र और स्थायी निकाय बना सकती है।

शीर्ष कोर्ट की यह टिप्पणी मणिपुर में वन और पर्यावरण मंत्री टी. श्यामकुमार की अयोग्यता पर आई है। श्यामकुमार कांग्रेस के टिकट पर जीते थे, लेकिन राज्य में भाजपा के नेतृत्व वाली सरकार में शामिल हो गए।

फैसले में शीर्ष कोर्ट ने कहा कि स्पीकर अनिश्चित समय के लिए अयोग्यता याचिका को रोके नहीं रख सकते। कोर्ट ने जोर दिया कि स्पीकर के लिए जरूरी है कि मामले पर उचित समय अवधि के भीतर फैसला ले और सिफारिश की कि अयोग्यता याचिकाओं पर तीन महीने के भीतर फैसला होना चाहिए।

पीठ ने कहा कि स्पीकर की स्वतंत्रता को लेकर कई बार सवाल उठाए गए हैं। पीठ ने सवालिया लहजे में कहा, “क्या स्पीकरण एकमात्र व्यक्ति है जिसे अयोग्यता याचिकाओं पर फैसला लेने की जिम्मेदारी दी जाए, खास तौर से जब वह भी एक राजनीतिक दल का सदस्य है?”

कोर्ट ने कहा कि दलबदल जैसे मामले को लेकर अयोग्य करार देने पर संसद या विधानसभा के चुने हुए सदस्यों को बने रहने की अनुमति नहीं दी जानी चाहिए।

मणिपुर मामले में शीर्ष कोर्ट ने स्पीकर को अयोग्यता याचिका पर 4 हफ्ते के भीतर फैसला लेने को कहा है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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