पिछड़ा वर्ग के जाति-वार जनगणना की मांग पर Supreme Court ने केंद्र से मांगा जवाब

0

उच्चतम न्यायालय ने शुक्रवार को उस जनहित याचिका पर केंद्र, राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग और सामाजिक न्याय और अधिकारिता मंत्रालय से जवाब मांगा, जिसमें पिछड़े वर्ग के लिए जाति-वार जनगणना की मांग की गई है। यह याचिका वकील जी.एस. मणि के माध्यम से तेलंगाना के निवासी जी. मल्लेश यादव और अल्ला रामकृष्ण की ओर से दायर की गई थी।

मामले में एक संक्षिप्त सुनवाई के बाद, मुख्य न्यायाधीश एस. ए बोबडे की अध्यक्षता वाली पीठ ने नोटिस जारी किया और टिंकू सैनी द्वारा दायर की गई इसी तरह की याचिका के साथ मामले को टैग किया, जिसमें इसी पीठ ने 17 अक्टूबर, 2020 को नोटिस जारी किया था।

याचिका में तर्क दिया गया कि पिछड़ा वर्ग के लिए जातिवार जनगणना के बिना, शिक्षा और रोजगार के क्षेत्रों में पिछड़ी जातियों को आरक्षण देने के लिए संविधान के अनुच्छेद 15 (4 और 5) और 16 (4 और 5) में स्पष्ट प्रावधान है।

याचिका के अनुसार, “संविधान के अनुच्छेद 243-डी (6) के तहत स्थानीय निकाय में पिछड़ा वर्ग को आरक्षण देने का प्रावधान हैं। जाति-वार जनगणना के अभाव में, पिछड़ा वर्ग के आरक्षण का प्रतिशत कैसे तय किया जा सकता है।”

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि 1979-80 में गठित मंडल आयोग की प्रारंभिक सूची में पिछड़ी जातियों और समुदायों की संख्या 3,743 थी।

याचिका के अनुसार, “ओबीसी की केंद्रीय सूची में पिछड़ी जातियों की संख्या अब बढ़ गई है। 2006 में राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग के अनुसार इसकी संख्या बढ़कर 5,013 हो गई है, लेकिन सरकार ने जाति के आधार पर कोई सर्वेक्षण नहीं किया है।”

न्यूज स़ोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleVaranasi पहुंचे पेट्रोलियम मंत्री बोले, जाड़े की वजह से गैस के दाम में हुई वृद्धि
Next articleBihar : पेट्रोल, डीजल की बढ़ती कीमतों के विरोध में तेजस्वी साइकिल चलाकर विधानसभा पहुंचे
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here