AIIMS एमबीबीएस परीक्षा को ऑफलाइन कराने की याचिका को सुप्रीम कोर्ट ने ठुकराया

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जयपुर । अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान एम्स की एमबीबीएस परीक्षा ऑनलाइन होने के साथ साथ परीक्षा चार फेज में ही कराई जाएगी। इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार के दिन एमबीबीएस परीक्षा को ऑफ लाइन कराने के लिये लगाई गई गुहार को ठुकरा दिया है। सुप्रीम कोर्ट ने दो टूक कहा है कि हम एम्स के उत्कृष्ट मानकों को कमतर नहीं कर सकते।

न्यायमूर्ति अरूण मिश्रा और न्यायमूर्ति यूयू ललित की पीठ ने गुरुवार को कुछ छात्राओं द्वारा लगाई गई  याचिका जिसमें एम्स की एमबीबीएस की परीक्षा ऑन लाइन कराने के निर्णय को चुनौती दी गई थी उसे खारिज कर दिया है। पीठ ने कहा कि हम एम्स द्वारा तय किए मानको को कतई कम नहीं कर सकते। साथ ही पीठ ने यह भी कहा है कि अगर कोई अथॉरिटी परीक्षा को फूल-प्रूफ बनाता है और उसमें पारदर्शिता लाने की कोशिश करता है तो उसे यह मौका देना ही चाहिए।

पीठ ने एम्स की ओर से पेश वकील दुष्यंत पराशर की उस दलील को स्वीकार किया कि ऑफ लाइन परीक्षा में कुछ तरह की समस्या पेश होने की आशंका बनी रहती है। दुष्यंत पराशर ने कहा कि ऑफ लाइन में पेपर लीक सहित कई अन्य खतरे की आशंका रहती है। पीठ ने याचिकाकर्ता छात्रों की इस दलील को भी ठुकरा दिया कि परीक्षा चार फेज में होती है और चारों में प्रश्नों की कठिनता का स्तर अलग होती है। पीठ ने एम्स की ओर पेश वकील दुष्यंत पराशर की इस पक्ष पर भी सहमति जताई कि चारों परीक्षाओं में प्रश्नों की कठिनता का स्तर एकसमान होता है।

एम्स की एमबीबीएस कोर्स में एडमिशन के लिए ऑनलाइन परीक्षा 26 और 27 मई को होनी है। यह परीक्षा 807 सीटों के लिए चार फेज में कराई जाएगी इस परीक्षा में लगभग  4.60 लाख अभ्यर्थी सम्मिलित होगें।

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