जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंधों पर रोक लगाने से सुप्रीम कोर्ट का इनकार

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सुप्रीम कोर्ट ने मंगलवार को जम्मू-कश्मीर में प्रतिबंध हटाने पर कोई अंतरिम या तत्काल आदेश पारित करने से इनकार कर दिया, जिसमें राज्य की संचार सेवाएं बहाल करने की मांग की गई थी। अदालत ने कहा कि स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए केंद्र प्रतिबंधों पर स्वतंत्र रूप से फैसले लेने के लिए स्वतंत्र है। न्यायमूर्ति अरुण मिश्रा की अध्यक्षता वाली शीर्ष अदालत की खंडपीठ ने यह बात तब कही जब केंद्र ने कहा कि वह जम्मू-कश्मीर में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है।

शीर्ष अदालत ने कहा कि केंद्र को सामान्य स्थिति बहाल करने के लिए समय की आवश्यकता है, क्योंकि रातोंरात कुछ नहीं किया जा सकता है। कांग्रेस नेता तहसीन पूनावाला द्वारा दायर याचिका पर दो सप्ताह के लिए सुनवाई स्थगित कर दी गई है। पूनावाला की ओर से जम्मू-कश्मीर के संबंध में केंद्र द्वारा लिए गए फैसले और प्रतिबंधों को चुनौती दी गई है।

मामले की गंभीरता को देखते हुए अदालत ने कहा कि अभी हस्तक्षेप नहीं किया जाएगा और सरकार को घाटी में कानून-व्यवस्था बनाए रखने के अपने प्रयासों को जारी रखना चाहिए।

अदालत ने आश्वासन दिया कि कुछ दिनों में घाटी में सामान्य स्थिति बहाल हो जाएगी। केंद्र ने कहा कि 2016 में पैदा हुए तनाव के दौरान राज्य में 47 लोग मारे गए थे, लेकिन इस बार एक भी व्यक्ति की मौत नहीं हुई है।

केंद्र सरकार ने अदालत को यह भी बताया कि वह दैनिक आधार पर स्थिति की समीक्षा कर रही है और मानवाधिकार उल्लंघन को कम से कम करना सुनिश्चित करने के लिए प्रतिबद्ध है।

गौरतलब है कि पिछले हफ्ते जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले संविधान के अनुच्छेद-370 को हटाने का फैसला लिया गया, जिसके बाद राज्य में अप्रिय घटनाओं को रोकने के लिए कर्फ्यू लगाया गया है।

पूनावाला ने शीर्ष अदालत में कर्फ्यू और अन्य प्रतिबंधों को हटाने के साथ ही शिक्षा और स्वास्थ्य सेवाओं की बहाली की मांग की है।

जब अदालत ने पूछा कि घाटी में कब तक प्रतिबंध जारी रहेगा, तो अटॉर्नी जनरल के. के. वेणुगोपाल ने कहा कि सरकार लोगों को होने वाली असुविधा को कम से कम करने के साथ ही शांति बनाए रखने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि स्थिति अत्यधिक संवेदनशील है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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