गोहिंसा पर सख्त सुप्रीम कोर्ट, कहा-दोषियों पर हो जल्द कार्रवाई, पीड़ितों को मिले मुआवजा

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नई दिल्ली। देश के अलग-अलग हिस्सों में गोरक्षा के नाम पर हुई हत्याओं के मामले में सुप्रीम कोर्ट अब सख्त नजर आ रहा है। मामले पर शुक्रवार को अहम सुनवाई करते हुए कोर्ट ने कहा कि जो लोग कानून को ठेंगा दिखाकर गोरक्षा के नाम पर अपराध कर रहे हैं उन पर शिकंजा कसने की जरूरत है। पहलू खान हत्या मामले पर सुनवाई के दौरान शीर्ष अदालत ने कहा कि ऐसे मामलों पर पीड़ित परिवारों को मुआवजा देना जरूरी है। यह राज्य सरकारों की जिम्मेदारी है कि ऐसे मामलों पर रोक लगाई जाए व पीड़त परिवारों को मुआवजा दें।

शीर्ष अदालत ने उत्तर प्रदेश, राजस्थान, गुजरात, झारखंड, कर्नाटक को आदेश दिया कि वे अपनी कंप्लायंस रिपोर्ट आज ही दाखिल कर दें। कोर्ट ने कहा कि कानून व्यवस्था को लेकर अन्य राज्य भी जितना जल्दी हो सके अपनी रिपोर्ट दाखिल करें। कोर्ट ने एस मामले की अगली सुनवाई के लिए 31 अक्टूबर की तारीख तय की है।

गौरतलब है कि 6 सितंबर के अपने आदेश में उच्चत्तम न्यायालय ने सख्त आदेश दिया था कि भारत के हर जिले में सीनियर पुलिस ऑफिसर तैनात किए जाए। अदालत ने राज्य सरकारों से कहा कि गाय को लेकर सामने आ रही घटनाओं पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जाने चाहिए। कोर्ट ने कहा कि इसके लिए राज्य सरकारें हर जिले में एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की नियुक्त करें ताकि कथित गोरक्षकों द्वारा की जा रही मारपीट की घटनाओं को रोका जा सके व त्वरित कार्रवाई की जा सके। कोर्ट ने मामले पर सख्ती दिखाते हुए राज्य सरकारों को सात दिन के अंदर यह टास्क फोर्स बनाने का आदेश दिया।

मामले की सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश ने कहा कि हमें पता है कि देश में इसे रोकने के लिए कानून है लेकिन इसके अनुसार नियोजित कार्रवाई करके हिंसा को बढ़ने से रोका जा सकता है। बता दें कि राजस्थान के अलवर, उत्तर प्रदेश के दादरी सहित कई प्रदेशों में कथित गोरक्षा द्वारा गो तस्करों को पीट-पीटकर मार डालने का मामला सामने आया था जिस पर रोक लगाने के लिए कुछ लोगों ने सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था। इस जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए शीर्ष अदालत ने इसी वर्ष 7 अप्रैल को केंद्र व 6 प्रदेश सरकारों को नोटिस भेजे थे। जिसमें उनसे घटनाओं के संबंध में जवाब मांगा था।

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