निर्भया मामले की सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट की जज हुईं बेहोश

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निर्भया सामूहिक दुष्कर्म और हत्या मामले में चार दोषियों को अलग-अलग फांसी देने की केंद्र सरकार की याचिका पर फैसला सुनाते हुए सुप्रीम कोर्ट की न्यायाधीश न्यायमूर्ति आर. बनुमथी शुक्रवार को अदालत कक्ष में बेहोश हो गईं। न्यायमूर्ति बनुमथी के बेहोश होने पर अदालत परिसर में अफरातफरी मच गई। बनुमथी न्यायाधीश की कुर्सी पर सहज प्रतीत हो रही थीं, मगर वह अचानक बेहोश हो गईं।

मामले में आरोपियों का प्रतिनिधित्व कर रहीं महिला वकील मदद के लिए चिल्लाईं और महिला सुरक्षा कर्मचारियों से न्यायाधीश की मदद करने को कहा। कुछ देर बाद न्यायाधीश बनुमथी को होश आ गया और उन्हें सुरक्षा कर्मचारियों द्वारा न्यायाधीशों के चैंबर में ले जाया गया।

बाद में उन्हें व्हीलचेयर पर अदालत परिसर की इन-हाउस डिस्पेंसरी में ले जाया गया।

इसके बाद न्यायमूर्ति ए.एस. बोपन्ना ने उठते हुए कहा कि इस मामले पर आदेश चैंबर में दिया जाएगा। न्यायमूर्ति बनुमथी तीन न्यायाधीशों वाली पीठ की अध्यक्षता कर रही थीं। पीठ के अन्य न्यायाधीशों में न्यायाधीश अशोक भूषण व बोपन्ना शामिल थे।

पता चला है कि न्यायाधीश बनुमथी को तेज बुखार था। उन्होंने दवा ली। तेज दवा का उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ा।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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