रफाल पर दिए सुप्रीम कोर्ट के फैसले से न्यायपालिका की विश्वसनीयता कम हुई: अरुण शौरी

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जयपुर। अटल बिहारी वाजपेई की सरकार में मंत्री रहे एवं पूर्व पत्रकार अरुण शौरी ने शुक्रवार को रिपेयर मामले को लेकर कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने मामले पर जो फैसला सुनाया है देश की न्यायपालिका पर विश्वास कम करने के जैसा है अरुण शौरी ने याचिकाकर्ताओं में से एक है जो रफ्फेल मामले की जांच की बात कर रहे हैं जिन्होंने रफाल डील के लिए जांच में सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की थी.

एक अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस की खबर के मुताबिक एक कार्यक्रम में पत्रकारों से पूछा सवाल पर रफाल मामले पर सुप्रीम कोर्ट को लेकर उन्हें कोई पछतावा है तो इस बात का जवाब देते हुए और छोरी ने कहा कि मुझे कोई पछतावा नहीं वास्तव में फैसले से न्यायपालिका की विश्वसनीयता कम हुई है इसके अलावा उन्होंने कहा कि सरकार से की ओर से दी गई रिपोर्ट के आधार पर फैसला सुना दिया गया इसलिए हमने अपनी बात को साबित किया है.

इसके अलावा और चोटी का कहना है कि वह पर मामले को लेकर पुनर्विचार याचिका भी दायर करेंगे इसके अलावा अरुण शौरी ने अफसोस जताते हुए कहा कि देश में कुछ ही समाचार पत्र एवं समाचार चैनल बचे हैं जो सच में पत्रकारिता कर रहे हैं इसके अलावा उन्होंने कहा कि पत्रकारिता केवल दो पक्षों पर राय लेना भर तक सीमित हो गई है.

इसके अलावा और छोरी ने कहा कि पत्रकारों का कर्तव्य है कि वह सकता और लोगों के बीच सच बोले मुंह में हड्डी रखने वाला कुत्ता रोक नहीं सकते सवाल यह नहीं है कि प्रधानमंत्री क्या करते हैं सवाल यह है कि आप क्या करते हैं.

आपको बता दें कि अरुण शौरी लंबे समय से मोदी सरकार के आलोचक रहे हैं और वह समय समय पर सही सवाल उठाकर मोदी सरकार से सवाल करते रहे हैं और उन्होंने रफाल मामले को लेकर सुप्रीम कोर्ट में याचिका भी दायर की थी इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि इस मामले की किसी भी बाहरी एजेंसी से जांच कराने की जरूरत नहीं है.

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