उज्जैन की Sunita ने योग की खूबियां जानी तो कर डाली पीएचडी

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समस्याएं नए रास्ते दिखाने में मददगार होती हैं, ऐसा ही कुछ हुआ उज्जैन की डॉ. सुनीता बागड़िया के साथ। उन्हें स्वास्थ्य संबंधी समस्या के निदान के लिए योग का सहारा लेना पड़ा और उनके लिए योग क्रिया इतनी मददगार साबित हुई कि उन्होंने आगे चलकर इस पर पीएचडी की उपाधि ही हासिल कर ली। शहर के कोतवाली क्षेत्र में निवासरत डॉ. सुनीता बागड़िया पिछले 20 वर्षों से महिलाओं को योग सिखा रही हैं। उन्होंने योग पर पीएचडी भी की है। उनकी पीएचडी की कहानी रोचक है। वे बताती हैं कि जब उनकी प्रसूति हुई थी तो उनका वजन काफी बढ़ गया था और उनके दोनों घुटनों में गैप आ गया था। डॉक्टर ने उन्हें नीचे बैठने से मना कर दिया था। काफी समय तक तो ऐसे ही चलता रहा, लेकिन एक दिन उन्हें लगा कि इस समस्या का निदान करना जरूरी है। उन्होंने प्राचीन योग पद्धति का सहारा लिया और योगगुरू नारायण वामन पित्रे द्वारा योग की शिक्षा प्राप्त की। योग के माध्यम से कुछ समय पश्चात उनकी घुटने की समस्या पूर्णत समाप्त हो गई।

डॉ. बागड़िया बताती हैं कि आगे चलकर उनकी योग के प्रति रूचि बढ़ी और उन्होंने सोचा कि क्यों न योग के माध्यम से लोगों की स्वास्थ्य सम्बन्धी समस्याओं का निराकरण किया जाये। डॉ. बागड़िया ने भोपाल के बरकतउल्ला विश्वविद्यालय से योग में डिप्लोमा और फिर स्नातकोत्तर किया। इसके बावजूद वे योग में और अधिक ज्ञान प्राप्त करना चाहती थी। इसी जिज्ञासा के चलते उन्होंने योग में पीएचडी की। उनके द्वारा सन 2006 में योग का अधिक से अधिक प्रचार-प्रसार करने के उद्देश्य से योगानन्दनम नामक साप्ताहिक समाचार-पत्र भी प्रकाशित किया जाने लगा।

बागड़िया द्वारा महिलाओं की विभिन्न स्वास्थ्य सम्बन्धी शिकायतों को दूर करने के लिये योगानन्दनम नारी शक्तिपीठ नामक संस्था शुरु की, जो महिला सशक्तीकरण के लिये निरन्तर कार्य करती रहती हैं। पिछले 20 वर्षों से उनके द्वारा महिलाओं को योग सिखाया जा रहा है। इनका उद्देश्य महिलाओं को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना है। साथ ही इनकी संस्था द्वारा महिलाओं को पढ़ाई के साथ-साथ अन्य कलात्मक गतिविधियां भी निरन्तर सीखने के लिये प्रेरित किया जाता है। डॉ. बागड़िया का मानना है कि पढ़ाई की कोई उम्र नहीं होती है।

news source आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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