हस्तशास्त्र: अपने क्रोध और घृणा को छुपा नहीं पाते हैं ऐसे व्यक्ति

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हर व्यक्ति के जीवन में ज्योतिषशास्त्र और हस्तरेखा शास्त्र का विशेष महत्व होता हैं वही मनुष्य की हथेली में शनि रेखा का प्रभाव उसके व्यक्तित्व पर दिखाई देता हैं वही शनि के प्रभाव के चलते ना केवल मनुष्य के शारीरिक गठन पर असर पड़ता हैं बल्कि उसका व्यवहार भी प्रभावित हो जाता हैं वही ज्योतिष के मुताबिक हस्तरेखा में मध्यमा अंगुली के नीचे शनि पर्वत का स्थान माना जाता हैं वही यह पर्वत बहुत ही भाग्यशाली मनुष्यों के हाथों में ही विकसित अवस्था में मिलता हैं शनि की शक्ति का अनुमान मध्यमा की लम्बाई और गठन में देखकर ही लगया जा सकता हैं वही मध्यमा अंगुली को भाग्य की देवी माना जाता हैं भाग्यरेखा की समाप्ति इसी अंगुली की मूल में होती हैं पूर्ण विकसित शनि पर्वत वाला व्यक्ति प्रबल भाग्यवान होता हैं ऐसे मनुष्य जीवन में अपने प्रयत्नों से बहुत अधिक उन्नति प्राप्त करते हैं। वही शनि पर्वत प्रधान मनुष्य, इंजीनियर, वैज्ञानिक, जादूगर, साहित्यकार, ज्योतिषी और बड़े कृषक होते हैं।

वही अगर शनि रेखा लम्बी और सीधी हैं और गुरु और शुक्र की अंगुलियां उसकी ओर झुक रही हैं, तो मनुष्य के स्वभाव और चरित्र में शनिग्रहों के गुणों की प्रधानता हो जाती हैं वही ज्योतिष के मुताबिक शनि ग्रह से प्रभावित मनुष्य के शारीरिक गठन को बहुत ही सरलता से पहचाना जा सकता हैं। ऐसा व्यक्ति कद में असामान्य रूप में लम्बे होते हैं उनका शरीर सुसंगठित मगर सिर पर बाल कम होते हैं वही लम्बे चेहरे पर अविश्वास और संदेह से भरी उनकी गरी छोटी आंख हमेशा ही उदास बनी रहती हैं। वही उत्तेजना, क्रोध और घृणा को वह छिप नहीं पाते हैं।

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