स्टटगार्ट ने मार्कस को नया कोच नियुक्त किया

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स्टटगार्ट ने मार्कस वेंजेरिल को अपने नए मुख्य कोच के रूप में नियुक्त किया है। जर्मन लीग क्लब ने अपने आधिकारिक बयान में इसकी घोषणा की। दो दिन पहले ही कोच टेफुन कोर्कुट को उनके पद से स्टटगार्ट क्लब ने निकाल दिया था। ऐसे में मार्कस को टीम का नया कोच बनाया गया है और क्लब के साथ अपने करार के तहत वह जून, 2020 तक इस पद पर बने रहेंगे।

स्टटगार्ट के खेल निदेशक माइकल रेश्के ने कहा, “मार्कस के साथ हमने एक कोच के सफल सफर के साथ प्रतिबद्धिता की है। वह जर्मन लीग को बेहतर रूप से जानते हैं और यह हमारे लिए सबसे महत्वपूर्ण है। हम यह समझ चुके हैं कि हमने स्टटगार्ट के लिए सही कोच का चुनाव किया है। वह हमारी टीम का विकास करेंगे।”

मार्कस ने अपने बयान में कहा, “मैं इस कोच पद का कार्यभार संभालने के लिए तैयार हूं। स्टटगार्ट वर्तमान में गंभीर स्थिति में है। मैं टीम की क्षमता को जान गया हूं और नई टीम के साथ काम करने के लिए उत्सुक हूं।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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