अध्ययन, गैर-संचारी बीमारी का बढ़ता ही जा रहा है, आंकड़ा

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जयपुर। बीमारियां दो प्रकार की होती है, 1. गैर-संचारी और 2. संचारी बीमारी। विषषज्ञों के मुताबिक गैर संचारी बीमारी दीर्घकालीन बीमारियो को कहा जाता है, जो कि संक्रमण से नहीं फैलती है। जैसे कि कैंसर, शुगर और दिल का दौरा।

जबकि संचारी बीमारियां इसके विपरीत होती है, ये बीमारियां संक्रमण के माध्यम से फैलती है। इनमें मलेरिया, टायफायड, चेचक और इन्फ्लूएन्जा जैसे रोग शामिल होते हैं। हाल ही में भारतीय आयुर्विज्ञान अनुसंधान परिषद की रिपोर्ट ‘इंडिया हेल्थ आॅफ द नेषंस स्टेट्स’ के अनुसार, वर्ष 2016 में होने वाली कुल मौतों में गैर-संचारी रोगों का योगदान 61.8% बताया गया है।

रिपोर्ट के अनुसार केरल,गोवा और तमिलनाडु में महामारी के संक्रमण यानि संचारी रोगों के कारण हुई मौतें के आंकड़े कम पाए गए जबकि मातृत्व, नवजात एवं पोषण संबंधी गैर-संचारी बीमारियां मृतकों की संख्या में वृद्धि बताई गई है। बताया जा रहा है कि इससे बचने के लिए केन्द्र सरकार इसके संबंध में कई प्रकार से प्रयास कर रही है।

जिसमें बताया गया है कि केन्द्र सरकार द्वारा राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिषन के तहत कैंसर, मधुमेह और हृदय रोगों के साथ ही स्ट्रोक की रोकथाम एवं नियंत्रण के लिए राष्ट्रीय कार्यक्रम चलाया जा रहा है। इस कार्यक्रम के उद्देष्यों के बारे में बताया जा रहा है कि इसका कैंसर सहित सामान्य गैर-संचारी रोगों से लोगों को सुरक्षा प्रदान करना है।

इसके अलावा कैंसर की तृतीयक देखभाल में सुविधाओें को बढ़ाने के लिए केंद्र सरकार देष के विभिन्न हिस्सों में राज्य कैंसर संस्थानों ओर तृतीयक देखभात केंद्रों की स्थापना में सहायता हेतु नई योजनाएं लागू की जा रही है।

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