छात्र बोले, ऑफलाइन क्लास ज्यादा बेहतर, स्कूल में लानी होगी Kovid रिपोर्ट

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कोरोना महामारी के कारण बीते दस माह से बंद दिल्ली के स्कूल सोमवार (18 जनवरी) से खुल गए। स्कूल खुलते ही छात्रों में गजब का उत्साह है। छात्रों के अनुसार बोर्ड परीक्षा की तैयारी करने के लिए स्कूल का खुलना ज्यादा बेहतर है। वहीं निजी स्कूलों ने बच्चों को कोविड रिपोर्ट लाने के लिए भी कहा गया है। छात्रों का कहना है कि, “स्कूल खुलने से हम बहुत खुश हैं। घर पर ऑनलाइन पढ़ाई में कुछ समस्याएं थी, हम अपने सवालों को न ढंग से पूछ पाते थे और न उत्तर समझ पाते थे।”

“ऑफलाइन पढ़ाई में बेहतर तरीके से अपनी समस्याओं को समझ सकते हैं, और न समझ आने पर फिर पूछ भी सकते हैं।”

कोरोना महामारी के बाद खुल रहे स्कूलों में बच्चों को भेजने के लिए अधिकतर अभिभावकों ने अपनी मंजूरी दी है। स्कूल प्रशासन का मानना है कि जल्द ही बाकी अभिभावक भी मंजूरी देंगे और स्कूल में पहले की तरह संख्या बढ़ जाएगी।

हालांकि स्कूल खुलने के बाद कुछ बदलाव तो जरूर हुए हैं। जिसमें पहला स्कूलों में प्रार्थना सभा(असेंबली) नहीं होगी, ना ही बच्चों के खाने के लिए कैंटीन खोली जाएगी। ना ही स्कूलों ने बच्चों को परिवहन की सुविधा दी है। बच्चों को खुद ही स्कूल पहुंचना होगा।

दिल्ली के प्राइवेट स्कूल प्रशासन ने बच्चों से कोरोना रिपोर्ट भी मांगी है। विद्या बाल भवन स्कूल के प्रिंसिपल डॉ. सतवीर शर्मा ने आईएएनएस को बताया, “स्कूल खुल जाने से साभी के लिए एक राहत है, बच्चे अब प्रभावी रूप से पढ़ाई कर सकेंगे, वहीं टीचर्स और बच्चे आमने सामने बैठ कर बात कर सकेंगे और पढ़ाई से सम्बंधित समस्याओं पर भी चर्चा कर सकेंगे।”

“हमने बच्चों को कहा है कि आप अपनी कोविड रिपोर्ट भी साथ लेकर आएं और स्कूल में जमा करा दें, इससे हम और हमारे अन्य बच्चे सुरक्षित रहेंगे।”

हालांकि स्कूल में मौजूद मेडिकल रूम को कोविड 19 आइसोलेशन रूम में तब्दील कर दिया गया है।

स्कूल की एक टीचर ने आईएएनएस से कहा कि, “बहुत अच्छा लगा बच्चों से मुलाकात करके। ऑनलाइन क्लास के दौरान बहुत सारी चुनौती होती हैं। हम उम्मीद कर रहे हैं आने वाले दिनों में स्कूल में बच्चों की संख्या बढ़ेगी।”

दरअसल राजधानी दिल्ली में करीब दस महीने के बाद स्कूल खुले हैं। दिल्ली के गवर्नमेंट गर्ल्स सेकेंडरी स्कूल में जब 10वीं क्लास की छात्राएं स्कूल पहुंची तो बेहद खुश दिखीं। बच्चों ने खुशी जाहिर करते हुए अपने कपड़ों पर मुस्कुराहट वाला एक स्टिकर लगाया हुआ था।

बच्चे मास्क लगाकर स्कूल पहुंचे रहे है और स्कूल्स में कोविड 19 सम्बंधित सभी नियमों का ध्यान रखा जा रहा है।

गवर्नमेंट गर्ल्स सेकेंडरी स्कूल की वाइस प्रिंसिपल संध्या सिंह ने आईएएनएस को बताया, “मुझे बहुत खुशी है, बच्चे जिक्स वक्त नहीं थे स्कूल में सन्नाटा पसरा हुआ था। हमारे यहां 10वीं क्लास के आज 147 बच्चे उपस्थित हैं, जबकि 107 बच्चे अभी आना बाकी हैं।”

“क्लास में टीचर्स के लिए बहुत चुनौती है, ऑफलाइन क्लासेस के साथ अब ऑनलाइन क्लास भी करनी है।”

दरअसल मई में बोर्ड की परीक्षाएं होनी हैं, ऐसे में अब कई राज्यों ने 10वीं 12वीं के छात्रों के लिए स्कूलों को खोलने का फैसला लिया है।

अभी फिलहाल स्कूल खोलने में काफी सख्ती का पालन किया गया है, जैसे कि छात्रों के अभिभावकों के लिखित इजाजत जरूरी है। वहीं स्कूल में कोई फिजिकल एक्टिविटी नहीं होगी और हर जगह गाइडलाइंस लिखनी होगी।

दिल्ली में कोरोना संक्रमण अब काफी हदतक काबू में आ चुका है, हालांकि खतरा बरकरार है, यही कारण है कि लोगों से नियमों का पालन करने की अपील की जा रही है।

नयूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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