Steve Smith ने बताया, हम स्थितियों से सामंजस्य नहीं बैठा पाए

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आईपीएल-13 में बुधवार को अपनी पहली हार झेलने के बाद राजस्थान रॉयल्स के कप्तान स्टीव स्मिथ ने कहा है कि उनकी टीम दुबई इंटरनेशनल स्टेडियम की स्थितियों से तालमेल नहीं बिठा पाई और इसलिए उसे कोलकाता नाइट राइडर्स के खिलाफ हार का सामना करना पड़ा। कोलकाता ने पहले बल्लेबाजी करते हुए राजस्थान के सामने 175 रनों की चुनौती रखी थी। राजस्थान की टीम 20 ओवरों में नौ विकेट खोकर 137 रन ही बना सकी।

मैच के बाद स्मिथ ने कहा, “हम प्लान के मुताबिक नहीं खेल पाए, लेकिन यह टी-20 क्रिकेट में होता है। हमने शुरुआत में जल्दी विकेट खो दिए। हम में से कुछ शायद यह सोच रहे थे कि हम शारजाह में ही खेल रहे हैं।”

मैदान को लेकर स्मिथ ने कहा, “एक छोर काफी बड़ा था। हमने ज्यादा गेंद सीमा रेखा के पार जाते हुए नहीं देखीं। हम जितने अच्छे से स्थितियों को अपना सकते थे उतना नहीं कर पाए।”

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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