राज्य जनता के पैसे से खुद का प्रचार न करें : सुप्रीम कोर्ट पैनल

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कुछ राज्य सरकार के खिलाफ जनता के पैसे का उपयोग कर सत्ताधारी पार्टी के नेताओं का प्रचार करने की शिकायतों के मद्देनजर, एक सर्वोच्च न्यायालय-शासित सामग्री विनियमन पैनल ने कहा कि वह चाहता है कि राज्य सरकारी प्रचार के लिए सामग्री नियामक की स्थापना करे। अगर राज्य अपने स्वयं के पैनल का गठन करने के इच्छुक नहीं हैं, तो वे केंद्र द्वारा गठित तीन-सदस्यीय सामग्री विनियमन समिति के हवाले यह कर सकते हैं।

यह कदम काफी महत्वपूर्ण है, क्योंकि दिल्ली अगले महीने चुनाव होने हैं और आप, भाजपा व कांग्रेस में त्रिकोणीय मुकाबला होने की उम्मीद है।

यह शिकायत अतीत में दिल्ली के मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल व राजस्थान के पूर्व सरकार के खिलाफ प्राप्त हुई है और तीन सदस्यीय सेंट्रल पैनल ने सूचना व प्रसारण मंत्रालय से राज्यों से जल्द से जल्द सामग्री नियामकों की स्थापना करने को कहा है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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