स्टार्टअप्स कृषि उपज बढ़ाने की दिशा में कार्य करें : प्रभु

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देश में खेतीबाड़ी में छोटे जोत उभरते स्टार्टअप्स के लिए विशिष्ट अवसर प्रदान करते हैं, जो तकनीक का उपयोग कर छोटे जोत में उपज बढ़ाने के तरीके और साधनों का पता लगाने के लिए अनूठा अवसर प्रदान कर सकते हैं। प्रभु ने यहां स्टार्ट-अप इंडिया ग्लोबल वेंचर कैपिटल समिट में कहा, “भारत में एक विशिष्ट प्रणाली है। खेती के लिए प्रयोग की जानेवाली लगभग सारी जमीन पर निजी मालिकाना हक है। खेत काफी छोटे-छोटे और बंटे हुए हैं, इसलिए हमारे पास उपज को एक अलग तरीके से बढ़ाने का अवसर है।”

उन्होंने कहा, “यहां स्टार्टअप्स के लिए अवसर हैं। छोटे से खेत से नई प्रौद्योगिकीयों से ज्यादा से ज्यादा उपज कैसे प्राप्त करें।”

प्रभु ने यह भी कहा कि केंद्र सरकार ने उद्योग, सेवा और कृषि क्षेत्रों में अंतर को पाटने के लिए एक विश्लेषण किया है, ताकि इन क्षेत्रों से ज्यादा प्राप्त किया जा सके।

उन्होंने कहा कि राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन की सरकार नई नीतियों और प्रशासनिक समाधानों को लागू कर रही है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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