बेंगलुरू में हवाईअड्डे से शहर के लिए हेलीटैक्सी सेवा शुरू, जानिए इसके बारे में !

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बेंगलुरू हवाईअड्डे से शहर के बीच एक हेलीकॉप्टर शटल सेवा की सोमवार को शुरुआत की गई, ताकि यात्रियों को गंतव्य के आखिरी पड़ाव तक पहुंचाया जा सके। बेंगलुरू इंटरनेशनल एयरपोर्ट लिमिटेड (बीआईएएल) शहर के केंद्र से 40 किलोमीटर दूर देवनहल्ली में है। बीआईएएल ने हेलीकॉप्टर सेवा प्रदाता थंबी एविएशन से हवाई यात्रियों को शहर से लाने-ले जाने के लिए साझेदारी की है।

थंबी के अध्यक्ष और ग्रुप कैप्टन के. एन. जी. नायर ने बताया, “हम फिलहाल सुबह 6.30 से 9.30 तक और शाम को 3.15 से 6 बजे तक हवाईअड्डे से शहर तक की सेवा प्रदान कर रहे हैं। एक बार में हेलीकॉप्टर में छह यात्री बैठ सकते हैं।”

इस सेवन-सीटर हेलीकॉप्टर का किराया प्रति यात्री 3,500 रुपये रखा गया है। यह सेवा बीआईएएल से हवाईअड्डे से 70 किलोमीटर दूर इलेक्ट्रॉनिक सिटी तक के लिए है, जहां इंफोसिस, हिन्दुस्तान एयरोनौटिक्स लिमिटेड समेत कई जानी मानी कंपनियां हैं।

इस हेलीकॉप्टर सेवा को शुरू करने की घोषणा केंद्रीय नागरिक विमानन मंत्री जयंत सिन्हा ने 2017 के अगस्त में की थी।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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