श्रीनगर : कोरोनावायरस रोगी के घर में चोरी

0

कश्मीर के बांदीपोरा जिले में चोरों ने रात के समय एक कोरोनावायरस रोगी के घर में तीन लाख रुपये चोरी कर फरार हो गए। पुलिस ने यह जानकारी सोमवार को दी।

पुलिस सूत्रों ने बताया कि जिले के सदरकोट इलाके में कोरोनावायरस मरीज को छोड़े गए घर पर रात के समय चोरी हुई।

उन्होंने बताया कि, “परिवार के एक सदस्य को कोरानावायरस से पॉजिटिव पाए जाने के बाद से सभी सदस्यों ने घर छोड़ दिया गया था और उसे वहां अकेले ‘होम आइसोलेशन’ के तहत रखा गया था।

पुलिस सूत्रों ने कहा, “चोरों ने कथित तौर पर तीन लाख रुपये और कुछ कीमती सामान चुरा लिए हैं। घटना में प्राथमिकी दर्ज की गई है।”

कश्मीर में यह पहली घटना है जिसमें चोरों ने वैश्विक त्रासदी का फायदा उठाते हुए एक वायरस पीड़ित के घर में चोरी की।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस

SHARE
Previous articleकोबे ब्रायंट की तौलिया 33,000 डालर में हुई नीलाम
Next articleकोविड-19 सर्वाइवर बनने का आनंद ले रही रीटा विल्सन
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here