श्रीलंकाई प्रतिनिधि कोविंद व मोदी से मिलेंगे

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भारतीय संसद के आमंत्रण पर श्रीलंकाई संसद का आठ सदस्यीय प्रतिनिधिमंडल यहां रविवार को पहुंचा। संसद के अध्यक्ष कारू जयसूर्या के नेतृत्व में तीन दिनी दौरे पर आए संसदीय प्रतिनिधि राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद और प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मिलेंगे। इससे दोनों देशों के बीच संबंध और मजबूत होने के आसार हैं। प्रतिनिधिमंडल में तमिल पार्टियों के सांसद शामिल हैं। वे सोमवार को विदेश मंत्री सुषमा स्वराज से भी मिलेंगे और द्वपक्षीय मुद्दों पर चर्चा करेंगे।

प्रतिनिधिमंडल में श्रीलंकाई संसद के नेता प्रतिपक्ष आर. सम्पंतन (तमिल नेशनल अलायंस), पूर्व मंत्री डगसल देवानंदा (ईलम पीपुल्स डेमोक्रेटिक पार्टी) और रानिल विक्रमसिंघे सरकार में मंत्री रहे मानो गणेशन भी शामिल हैं।

देवानंदा ने कहा कि वह इस अवसर का उपयोग श्रीलंकाई तमिलों के मुद्दों पर चर्चा के लिए करेंगे। इन मुद्दों का 1987 के भारत-श्रीलंका समझौते के आधार पर राजनीतिक समाधान जरूरी है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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