Sri lanka में ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका वैक्सीन को आपातकालीन इस्तेमाल की मंजूरी

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श्रीलंका के अधिकारियों ने शुक्रवार को ऑक्सफोर्ड-एस्ट्राजेनेका कोरोना वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दे दी, इसकी जानकारी फार्मास्युटिकल प्रोडक्शन एंड रेगुलेशन मंत्री चानना जयसुमना ने दी। समाचार एजेंसी सिन्हुआ की रिपोर्ट के अनुसार, जयसुमना ने कहा कि नेशनल मेडिसिन रेगुलेटरी अथॉरिटी (एनएमआरए) ने ब्रिटिश वैक्सीन के आपातकालीन उपयोग के लिए मंजूरी दे दी है, जबकि कई अन्य टीके भी राष्ट्रीय दवा नियामक प्राधिकरण के पाइपलाइन में हैं।

श्रीलंका ने पहली बार आपातकालीन उपयोग के लिए वैक्सीन को मंजूरी दी है।

प्राथमिक स्वास्थ्य देखभाल, महामारी और कोरोनावायरस रोग नियंत्रण राज्य मंत्री सुदर्शनी फर्नाडोपुल ने कहा कि वैक्सीन को फरवरी के मध्य तक श्रीलंका में आयात किया जाएगा।

फर्नाडोपुल ने कहा, “हमारा इरादा कम से कम 50 फीसदी आबादी को कवर करना है।”

श्रीलंका में अब तक कोरोनावायरस मामलों की संख्या 56 हजार से ज्यादा है, जबकि इस वायरस से यहां अबतक 276 लोगों की मौत हो गई है।

news source आईएएनएस

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बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

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