दक्षिण कोरियाई कंपनियों ने अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन किया

0
71

दक्षिण कोरिया की तीन कंपनियों ने अमेरिकी प्रतिबंधों का उल्लंघन कर पिछले साल उत्तर कोरिया से 55 लाख डॉलर से अधिक मूल्य के कोयला और लौह आयात किया। अमेरिका ने उत्तर कोरिया के परमाणु परीक्षणों पर प्रतिबंध लगाया हुआ है।

समाचार एजेंसी एफे ने कोरिया कस्टम सर्विस (केसीएस) के हवाले से बताया कि अप्रैल और अक्टूबर 2017 के बीच तीनों कंपनियों ने 58 लाख डॉलर के सामान आयात किए। सीमा शुल्क अधिकारियों ने कहा कि कंपनियों ने पारगमन के लिए रूसी बंदरगाह का इस्तेमाल किया।

केसीएस ने कहा कि कंपनियां उत्तर कोरियाई कोयले का पूंजीकरण करने की कोशिश कर रही थीं, जो बाजार दर से कम है।

संयुक्त राष्ट्र परिषद की प्रस्तावना 2371 के मुताबिक अगस्त 2017 से उत्तर कोरिया पर उसके खनिजों का निर्यात करने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा हुआ है।

न्यूज स्त्रोत आईएएनएस


SHARE
Previous articleजेब्रोनिक्स का टच कंट्रोल वाला वायरलेस स्पीकर ‘प्रिज्म’ लॉन्च
Next articleअभिजीत घोषाल भक्ति संगीत में हाथ आजमा रहे
बहुत ही मुश्किल है अपने बारे में लिखना । इसलिए ज्यादा कुछ नहीं, मैं बहुत ही सरल व्यतित्व का व्यक्ति हूं । खुशमिजाज हूं ए इसलिए चेहरे पर हमेशा खुशी रहती हैए और मुझे अकेला रहना ज्यादा पंसद है। मेरा स्वभाव है कि मेरी बजह से किसी का कोई नुकसान नहीं होना चाहिए और ना ही किसी का दिल दुखना चाहिए। चाहे वो व्यक्ति अच्छा हो या बुरा। मेरे इस स्वभाव के कारण कभी कभी मुझे खामियाजा भी भुगतान पड़ता है। मैं अक्सर उनके बारे में सोचकर भुला देता हूं क्योंकि खुश रहने का हुनर सिर्फ मेरे पास है। मेरी अपनी विचारए विचारधारा है जिसे में अभिव्यक्त करता रहता हूं । जिन लोगों के विचारों से कभी प्रभावित भी होता हूं तो उन्हें फोलो कर लेता हूं । अभी सफर की शुरुआत है मैने कंप्यूटर ऑफ माटर्स की डिग्री हासिल की है और इस मीडीया क्षेत्र में अभी नया हूं। मगर मुझे अब इस क्षेत्र में काम करना अच्छा लग रहा है। और फिर इसी में काम करने का मन बना लेना दूसरों के लिये अश्चर्य पूर्ण होगा। लेकिन इससे पहले और आज भी ब्लागर ने एक मंच दिया चिठ्ठा के रुप में, जहां बिना रोक टोक के आसानी से सबकुछ लिखा या बताया जा सका। कभी कभी मन में उठ रही बातों या भावों को शब्दों में पिरोयाए उनमें खुद की और दूसरों की कहानी कही। कभी उनके द्वारा किसी को पुकाराए तो कभी खुद ही रूठ गया। कई बार लिखने पर भी मन सतुष्ट नहीं हुआ और निरंतर कुछ नया लिखने मन बनता रहता है। अजीब सी बेचैनी जो न जाने क्या करवाएगी और कितना कुछ कर गुजर जाने की तमन्ना लिए निकले हैं इन सफरों, जहां उम्मीद और विश्वास दोनों कायम हैं जो अर्जुन के भांति लक्ष्य को भेद देंगे । मुझे अभी अपने जीवन में बहुत कुछ करना है किसी के सपनों को पूरा करना हैं । अब तो बस मेरा एक ही लक्ष्य हैं कि मैं बस उसके सपने पूरें करू।

LEAVE A REPLY

Please enter your comment!
Please enter your name here